IIT दिल्ली ने कैंपस में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद एमएससी भौतिकी छात्र ऋषिकेश कुमार की मृत्यु की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता इस पैनल का नेतृत्व करेंगी।
- IIT दिल्ली ने छात्र ऋषिकेश कुमार की मृत्यु की जांच के लिए पांच सदस्यीय पैनल बनाया है।
- सेवानिवृत्त दिल्ली उच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता इस समिति की अध्यक्ष होंगी।
- पैनल को दो सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपनी होंगी।
- छात्रों ने स्वतंत्र जांच के लिए व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु की जांच के लिए एक नए पांच सदस्यीय जांच पैनल की घोषणा की है। यह कदम कैंपस में 500 से अधिक छात्रों द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
इस महत्वपूर्ण समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता करेंगी। समिति में एम्स (AIIMS) नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि (जिनके नामों की घोषणा जल्द की जाएगी) और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल होंगे, जो सचिव और संयोजक के रूप में कार्य करेंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक छात्र की मृत्यु का नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठाता है। छात्रों का दबाव और जस्टिस मुक्ता गुप्ता की नियुक्ति यह दर्शाती है कि शैक्षणिक संस्थानों में जवाबदेही तय करने के लिए अब बाहरी न्यायिक हस्तक्षेप की मांग बढ़ रही है।
छात्रों का आक्रोश और न्यायिक पैनल की मांग संस्थान के भीतर गहरे असंतोष और सुरक्षा प्रणालियों में खामियों की ओर इशारा करती है।
घटनाक्रम के अनुसार, 31 वर्षीय ऋषिकेश कुमार ने शनिवार को कैंपस की एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। IIT दिल्ली के निदेशक रंगण बनर्जी ने आधिकारिक ईमेल के माध्यम से इस पैनल के गठन की पुष्टि की है।
पैनल का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत है। समिति छात्रों, संकाय सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करेगी, मौजूदा कैंपस प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगी और यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या संस्थान की व्यवस्थाओं में कोई कमी थी। पैनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
Frequently Asked Questions
1. जांच पैनल का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जांच पैनल की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता कर रही हैं।
2. पैनल को रिपोर्ट कब तक सौंपनी है?
पैनल को अपनी जांच पूरी कर दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें देनी होंगी।