गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने ₹40 करोड़ के वित्तीय अनियमितता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को अपनी छवि खराब करने की एक साजिश बताया है।

  • नीरजा गुप्ता ने ₹40 करोड़ के दुरुपयोग के आरोपों को 'भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण' बताया।
  • दावा किया कि केवल ₹16.50 करोड़ की पहली किस्त प्राप्त हुई थी, न कि पूरे ₹40 करोड़।
  • बचे हुए ₹14.59 करोड़ और ब्याज सहित राशि विश्वविद्यालय को वापस कर दी गई है।
  • NSUI और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद गुप्ता ने यूट्यूब पर वीडियो जारी कर सफाई दी।

गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत ₹40 करोड़ के कथित दुरुपयोग के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को एक "भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण विमर्श" करार दिया है, जिसका उद्देश्य उनकी पेशेवर छवि को धूमिल करना है।

हाल ही में राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद, गुप्ता ने यूट्यूब के माध्यम से एक विस्तृत वीडियो बयान जारी किया। आरोपों का मुख्य केंद्र यह था कि विश्वविद्यालय को PMJVK योजना के तहत ₹40 करोड़ प्राप्त हुए थे, जिनका हिसाब नहीं दिया जा सका।

वित्तीय स्थिति का स्पष्टीकरण

आरोपों का जवाब देते हुए, गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हालांकि ₹40 करोड़ की राशि परियोजना के लिए स्वीकृत की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय को कभी भी पूरी राशि प्राप्त नहीं हुई। उनके अनुसार, केवल ₹16.50 करोड़ की पहली किस्त जारी की गई थी और उसके बाद कोई अन्य अनुदान प्राप्त नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह धनराशि उनके व्यक्तिगत खाते में नहीं, बल्कि PIPMGVK जैन पांडुलिपि पहल के लिए गुजरात विश्वविद्यालय के आधिकारिक खाते में जमा की गई थी। प्राप्त ₹16.50 करोड़ में से ₹1,90,80,228 खर्च किए गए, जबकि शेष ₹14,59,19,772 (ब्याज सहित) उन्होंने अपने इस्तीफे के साथ बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से विश्वविद्यालय को वापस कर दिए।

जांच समिति पर उठाए सवाल

नीरजा गुप्ता ने विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति द्वारा आरोपों की जांच के लिए गठित समिति की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि समिति के दो सदस्य पिछले 11 महीनों से उनके खिलाफ व्यक्तिगत असंतोष रखते रहे हैं।

"क्या हम ऐसी समिति को निष्पक्ष कह सकते हैं जिसके सदस्य पहले से ही पूर्वाग्रह से ग्रसित हों?" - नीरजा गुप्ता का बयान।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला अकादमिक प्रशासन में पारदर्शिता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। गुप्ता ने उच्च शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेने की भी अपील की है।

परामर्श और अनुसंधान कार्य का बचाव

कुलपति के पद पर रहते हुए परामर्श (Consultancy) और शोध कार्य करने के आरोपों पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि शैक्षणिक नेताओं का देश के प्रति योगदान देना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) के प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नियमों के तहत था।

क्या आप जानते हैं?: सरकारी अनुदानों के प्रबंधन में 'उपयोगिता प्रमाण पत्र' (Utilization Certificate) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जो यह सिद्ध करता है कि पैसा सही काम में लगा है।

Frequently Asked Questions

1. नीरजा गुप्ता पर क्या आरोप हैं?
उन पर PMJVK योजना के तहत प्राप्त ₹40 करोड़ के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।

2. उन्होंने पैसों के बारे में क्या स्पष्टीकरण दिया है?
उन्होंने कहा कि केवल ₹16.50 करोड़ मिले थे और शेष राशि उन्होंने विश्वविद्यालय को वापस कर दी है।