IIT दिल्ली ने छात्र की संदिग्ध मौत की जांच के लिए न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के नेतृत्व में एक नई समिति गठित की है। कैंपस में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और छात्र प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता (सेवानिवृत्त दिल्ली उच्च न्यायालय न्यायाधीश) नई जांच समिति की अध्यक्षता करेंगी।
  • छात्रों ने पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार के शामिल होने का विरोध किया था।
  • पिछले 30 महीनों में संस्थान में 8 छात्रों ने आत्महत्या की है।
  • छात्रों की मुख्य मांगें: मृतक की मां को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और एसोसिएट डीन का इस्तीफा।

नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। संस्थान ने गुरुवार को एक नई जांच समिति के गठन की घोषणा की है, जिसकी अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता करेंगी। यह कदम तब उठाया गया है जब पूर्व उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने समिति से खुद को अलग कर लिया था।

छात्रों ने अशोक कुमार की नियुक्ति का कड़ा विरोध किया था। उनका आरोप था कि कुमार ने हालिया छात्र आंदोलनों को 'कट्टरपंथ' से जोड़ते हुए विवादास्पद टिप्पणी की थी। नए पैनल में AIIMS दिल्ली के मनोरोग विभाग के प्रमुख प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार को भी शामिल किया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक छात्र की मृत्यु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। संस्थान में पिछले 30 महीनों के भीतर 8 छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के आंकड़े एक गंभीर प्रणालीगत संकट की ओर इशारा करते हैं।

संस्थान के भीतर छात्रों और संकाय के बीच संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनहीन रवैया इस संकट का मूल कारण हो सकता है।

प्रदर्शनकारी छात्र अब प्रशासन के खिलाफ साक्ष्य जुटा रहे हैं। उनका आरोप है कि संस्थान के डीन और कुछ संकाय सदस्यों ने छात्रों के प्रति 'असंवेदनशील' और 'विद्रोही' टिप्पणियां की हैं। छात्र मांग कर रहे हैं कि मृतक की मां को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और छात्र कल्याण के एसोसिएट डीन को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

ऐतिहासिक संदर्भ: कैंपस में बढ़ता तनाव

IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और बढ़ते शैक्षणिक दबाव को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ी है। भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की बढ़ती दरें नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

Did You Know?: IIT दिल्ली में छात्र कल्याण के लिए 'स्टूडेंट-टीचर इंटरेक्शन काउंसिल' (STIC) जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन छात्र इनका प्रभावी उपयोग नहीं मान रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नई जांच समिति में कौन शामिल है?
समिति का नेतृत्व न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता कर रही हैं, जिसमें AIIMS के डॉ. प्रताप शरण और छात्र प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

2. छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्र मुआवजे और एसोसिएट डीन के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।