IIT हैदराबाद की अंतिम वर्ष की छात्रा साई पूर्णा ने बिना किसी कोचिंग संस्थान के केवल अपने अनुशासन और भाई के साथ से JEE क्रैक किया। उनकी यात्रा आत्म-संदेह से लेकर हजारों छात्रों को प्रेरित करने तक की है।
- साई पूर्णा ने बिना किसी कोचिंग के घर से रहकर JEE की तैयारी की।
- उन्होंने अपनी पसंदीदा ब्रांच (CSE/AI) के बजाय IIT का टैग पाने के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग चुनी।
- वर्तमान में वह 'अक्षरमाला' फाउंडेशन के माध्यम से तेलंगाना के वंचित छात्रों को शिक्षित कर रही हैं।
हैदराबाद की रहने वाली साई पूर्णा आज IIT हैदराबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की छात्रा हैं, लेकिन उनकी सफलता की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। वर्ष 2023 में JEE की परीक्षा देते समय, उन्होंने किसी भी महंगे कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। उनकी पूरी तैयारी घर पर, केवल किताबों और अपने भाई के अटूट सहयोग के दम पर हुई।
साई बताती हैं कि JEE की तैयारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सिलेबस नहीं, बल्कि निरंतरता (Consistency) थी। महीनों तक नींद और थकान से जूझते हुए, वे और उनके भाई सुबह 4 बजे तक पढ़ाई करते थे और फिर केवल 4-6 घंटे की नींद लेकर दोबारा पढ़ाई शुरू कर देते थे। उनके लिए शिक्षा केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि समाज में सम्मान और गरिमा के साथ जीने का एक जरिया थी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत में कोचिंग संस्कृति के बढ़ते प्रभुत्व के बीच, साई पूर्णा जैसी कहानियाँ यह साबित करती हैं कि सही दिशा और मानसिक दृढ़ता के साथ स्व-अध्ययन (Self-study) से भी शीर्ष संस्थानों में प्रवेश पाना संभव है। यह उन लाखों छात्रों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो आर्थिक या अन्य कारणों से कोचिंग नहीं ले पाते।
"शिक्षा वह माध्यम है जो समाज में सम्मान और गरिमा दिलाती है, और इसी विश्वास ने मुझे हर कठिन रात में आगे बढ़ने की शक्ति दी।" — साई पूर्णा
सफलता के इस सफर में उन्होंने एक बड़ा त्याग भी किया। काउंसलिंग के दौरान, उन्होंने अपनी पसंदीदा ब्रांच जैसे कंप्यूटर साइंस (CSE) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को छोड़कर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को चुना, क्योंकि उनका प्राथमिक लक्ष्य IIT का हिस्सा बनना था।
IIT हैदराबाद में आने के बाद, उन्होंने केवल पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वह वर्तमान में 'अक्षरमाला' (Aksharamaala) फाउंडेशन का नेतृत्व कर रही हैं, जो तेलंगाना के ग्रामीण सरकारी स्कूलों के वंचित छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या साई पूर्णा ने कोचिंग ली थी?
नहीं, उन्होंने पूरी तरह से घर पर रहकर और स्व-अध्ययन के माध्यम से JEE की तैयारी की थी।
2. साई पूर्णा वर्तमान में क्या कर रही हैं?
वह IIT हैदराबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा हैं और अक्षरमाला फाउंडेशन के माध्यम से वंचित छात्रों को पढ़ा रही हैं।