विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने चिंता जताई है कि मास्टर और पीएचडी स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में केवल बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) का उपयोग किया जा रहा है, जो छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता के बजाय केवल याद रखने की शक्ति का परीक्षण करते हैं।

  • मानविकी प्रवेश परीक्षाओं (CUET, UGC-NET) में MCQ प्रारूप का वर्चस्व बढ़ रहा है।
  • विश्लेषण और व्याख्या के बजाय 'तथ्यात्मक याददाश्त' (Factual Recall) पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रारूप उच्च-स्तरीय शोध कौशल को मापने में विफल है।

हाल के वर्षों में, भारत में मानविकी (Humanities) के छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। CUET-UG से लेकर UGC-NET और पीएचडी स्तर की परीक्षाओं तक, बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) अब मूल्यांकन का मुख्य आधार बन गए हैं। हालांकि ये परीक्षाएं छात्रों की जानकारी का परीक्षण करती हैं, लेकिन शिक्षाविदों ने सवाल उठाया है कि क्या ये परीक्षाएं वास्तव में एक शोधकर्ता के लिए आवश्यक 'गहन चिंतन' और 'विश्लेषणात्मक कौशल' को माप पा रही हैं?

तथ्यों का बोझ बनाम विश्लेषणात्मक गहराई

The Hindu द्वारा किए गए एक विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि परीक्षाओं का स्वरूप काफी हद तक 'तथ्यात्मक याददाश्त' (Factual Recall) की ओर झुक गया है। उदाहरण के लिए, 2025 के CUET-UG इतिहास पेपर का विश्लेषण करने पर पाया गया कि लगभग 71% प्रश्न केवल तथ्यों को याद रखने पर आधारित थे। इसमें शासकों के नाम, घटनाओं का क्रम और विशिष्ट शब्दावली जैसे प्रश्न शामिल थे।

यह प्रवृत्ति केवल स्नातक स्तर तक सीमित नहीं है। अंग्रेजी साहित्य के उच्च-स्तरीय परीक्षार्थियों को भी शोध सामग्री, साहित्यिक आलोचकों के उद्धरणों और कालक्रम (Chronology) को याद रखने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जहाँ एक ओर छात्र जटिल सिद्धांतों को समझने के बजाय 'कौन सा लेखक किस काल का है' जैसे प्रश्नों को रटने में समय बिता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शोध की असली आत्मा—अर्थात डेटा की व्याख्या और आलोचनात्मक विश्लेषण—पीछे छूटती जा रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यदि प्रवेश परीक्षा का आधार केवल रटना होगा, तो विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों को चुनेंगे जो जानकारी को स्टोर कर सकते हैं, न कि उन्हें जो जानकारी का उपयोग करके नए ज्ञान का सृजन कर सकते हैं। यह भविष्य के शोधकर्ताओं और विद्वानों की गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव डालता है।

मानविकी का अर्थ केवल तथ्यों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की व्याख्या करना है, जो MCQ के सीमित दायरे में संभव नहीं है।

छात्रों की तैयारी की रणनीति भी इस बदलाव से प्रभावित हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र और पीएचडी शोधकर्ता अब किताबों के गहरे अर्थ समझने के बजाय 'महत्वपूर्ण बॉक्स', 'टाइमलाइन' और 'पिछले वर्षों के प्रश्नों' (PYQs) को रटने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

तैयारी का तुलनात्मक स्वरूप

परीक्षा स्तरमुख्य फोकस क्षेत्रकौशल का प्रकार
CUET-UGतथ्यात्मक जानकारी, ऐतिहासिक नाम, तिथियांयाददाश्त (Recall)
UGC-NET/PGसाहित्यिक सिद्धांत, कालक्रम, शोध सामग्रीपहचान और मिलान (Recognition)
Ph.D. प्रवेशविषय विशेषज्ञता, शोध पद्धतिअपूर्ण विश्लेषणात्मक क्षमता
Did You Know?: CUET-UG 2025 के इतिहास पेपर में 70% से अधिक प्रश्न केवल तथ्यों को याद रखने पर आधारित पाए गए थे।

Frequently Asked Questions

1. MCQ आधारित परीक्षा का मुख्य नुकसान क्या है?
इसका मुख्य नुकसान यह है कि यह छात्र की आलोचनात्मक सोच और जटिल विषयों को समझाने की क्षमता का परीक्षण नहीं कर पाती।

2. क्या छात्र केवल रटकर परीक्षा पास कर सकते हैं?
हाँ, वर्तमान पैटर्न के अनुसार, यदि छात्र तथ्यों और कालक्रम को अच्छी तरह याद कर लेते हैं, तो वे उच्च अंक प्राप्त कर सकते हैं।