भारत में कुपोषण और 'छिपी हुई भूख' की गंभीर समस्या से निपटने के लिए खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) और जैव-सुदृढ़ीकरण (Biofortification) दो शक्तिशाली हथियार बनकर उभरे हैं। यह लेख बताता है कि कैसे ये तकनीकें सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर कर सकती हैं।

  • भारत वैश्विक कुपोषण के लगभग एक-तिहाई हिस्से के लिए जिम्मेदार है।
  • खाद्य सुदृढ़ीकरण प्रसंस्करण के दौरान पोषक तत्व जोड़ता है, जबकि जैव-सुदृढ़ीकरण फसल उत्पादन के स्तर पर होता है।
  • भारत ने अब तक गेहूं, बाजरा, मक्का और चावल की 152 जैव-सुदृढ़ किस्में विकसित की हैं।

भारत वर्तमान में कुपोषण की एक बहुआयामी चुनौती का सामना कर रहा है, जिसमें अल्पपोषण (under-nutrition), अति-पोषण (over-nutrition) और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी यानी 'छिपी हुई भूख' (Hidden Hunger) शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया के कुल कुपोषण में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) क्या है?

खाद्य सुदृढ़ीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रसंस्करण (processing) के दौरान मुख्य खाद्य पदार्थों जैसे चावल, गेहूं या नमक में विटामिन और खनिज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को जानबूझकर मिलाया जाता है। इसका उद्देश्य खाद्य सामग्री की पोषण गुणवत्ता को बढ़ाना या प्रसंस्करण के दौरान खोए हुए पोषक तत्वों को बहाल करना है। उदाहरण के लिए, नमक में आयोडीन मिलाना एक सफल वैश्विक कार्यक्रम रहा है, जिसने पिछले 25 वर्षों में दुनिया भर में लगभग 750 मिलियन घेघा (goitre) के मामलों को रोकने में मदद की है।

जैव-सुदृढ़ीकरण (Biofortification): एक स्थायी समाधान

जैव-सुदृढ़ीकरण पारंपरिक पादप प्रजनन या आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से फसलों की पोषक घनत्व को बढ़ाने की प्रक्रिया है। отличие from food fortification, यहाँ पोषक तत्व सीधे बीज के विकास के दौरान ही पौधे में समाहित हो जाते हैं। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जैव-सुदृढ़ीकरण लंबी अवधि के लिए अधिक लागत प्रभावी है क्योंकि इसमें केवल एक बार बीज विकास में निवेश की आवश्यकता होती है।

जैव-सुदृढ़ीकरण केवल खेती की तकनीक नहीं, बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को जड़ से मिटाने का एक स्थायी सामाजिक-आर्थिक समाधान है।

भारत के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (NARS) ने इस दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2014 से 2024 के बीच, भारत ने गेहूं (53), बाजरा (26), मक्का (24), चावल (14), तिलहन (21), दलहन (9) और अनाज अमरांथ (5) की कुल 152 जैव-सुदृढ़ किस्में विकसित और जारी की हैं।

भारत की पोषण संबंधी चुनौतियाँ और NFHS-6 के आंकड़े

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के आंकड़े भारत की स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 29.3% बच्चे 'स्टंटेड' (कद में कम) हैं और 31.8% बच्चे कम वजन के हैं। वहीं, वयस्कों में मोटापे की दर में भी वृद्धि देखी गई है, जो दर्शाता है कि समस्या केवल कैलोरी की कमी नहीं, बल्कि पोषक तत्वों के असंतुलन की भी है।

विशेषताखाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification)जैव-सुदृढ़ीकरण (Biofortification)
प्रक्रिया का स्तरप्रसंस्करण (Processing) के दौरानउत्पादन (Production/Seed) स्तर पर
पोषक तत्व कैसे मिलते हैंबाहरी रूप से मिलाए जाते हैंपौधे के भीतर प्राकृतिक रूप से विकसित
लागत प्रभावशीलतानिरंतर निवेश की आवश्यकताएक बार बीज विकास में निवेश (अधिक किफायती)
क्या आप जानते हैं?: नमक में आयोडीन मिलाने से दुनिया भर में थायराइड से जुड़ी बीमारियों में भारी कमी आई है।

Frequently Asked Questions

1. 'छिपी हुई भूख' से क्या तात्पर्य है?
जब शरीर को पर्याप्त कैलोरी तो मिलती है, लेकिन आवश्यक विटामिन और खनिज (सूक्ष्म पोषक तत्व) नहीं मिल पाते, तो इसे छिपी हुई भूख कहा जाता है।

2. जैव-सुदृढ़ीकरण खाद्य सुदृढ़ीकरण से बेहतर क्यों है?
जैव-सुदृढ़ीकरण अधिक टिकाऊ है क्योंकि यह बीज के माध्यम से अगली पीढ़ियों तक पोषक तत्व पहुँचाता है, जिससे बार-बार प्रसंस्करण की आवश्यकता नहीं होती।