IIT-धरवाड़ में भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों (BTKS) पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विज्ञान, स्वास्थ्य और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में प्राचीन ज्ञान के महत्व पर चर्चा होगी।

  • IIT-धरवाड़ में 5 और 6 सितंबर को भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों (BTKS) पर तीसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा।
  • सम्मेलन में विज्ञान, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और वास्तुकला में पारंपरिक ज्ञान के अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • प्रमुख वक्ताओं में पद्म भूषण विजेता शतावधानी आर. गणेश और अन्य प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), धरवाड़ अपने सेंट्रल लर्निंग थिएटर में 5 और 6 सितंबर को भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों (BTKS) पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक युग के साथ जोड़ना है।

IIT-धरवाड़ के निदेशक वेंकप्पैया आर. देसाई ने बताया कि यह सम्मेलन संस्थान के 'भारतीय ज्ञान प्रणाली उत्कृष्टता केंद्र' द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) विभाग का पूर्ण सहयोग प्राप्त है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है। आज के युग में, जब दुनिया टिकाऊ समाधानों की तलाश कर रही है, आयुर्वेद, योग और प्राचीन वास्तुकला जैसे विषय विज्ञान और तकनीक के साथ मिलकर नई दिशा दे सकते हैं।

प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकता है।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम में 12 आमंत्रित व्याख्यान, 24 मौखिक प्रस्तुतियाँ और 20 पोस्टर प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी। इसमें IITs, NITs और विभिन्न राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता भाग लेंगे। सत्रों का मुख्य विषय प्राचीन भारतीय तकनीक, सौंदर्यशास्त्र, आयुर्वेद, योग सूत्र, वैदिक विज्ञान और STEM शिक्षा के साथ पारंपरिक ज्ञान का एकीकरण होगा।

शोध के नए आयाम

सम्मेलन के दौरान कुछ क्रांतिकारी शोध विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें आयुर्वेद के माध्यम से AI-सहायता प्राप्त रोग निदान, पारंपरिक इमारतों का भूकंपीय मूल्यांकन और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके कम कार्बन वाले निर्माण सामग्री का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही, 6 सितंबर को दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा: 'An Introduction to Ancient Indian Technology' और 'The Elusive Ratio and the Advent of Calculus in India'।

सांस्कृतिक रूप से भी यह कार्यक्रम समृद्ध है। 5 सितंबर को SPIC MACAY के सहयोग से पद्म श्री विजेता पंडित वेंकटेश कुमार द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, महाभारत का एक डिजिटल प्रस्तुतीकरण भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगा।

Did You Know?: प्राचीन भारतीय गणितीय अवधारणाओं ने आधुनिक कैलकुलस और खगोल विज्ञान की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य विज्ञान, स्वास्थ्य, शिक्षा और वास्तुकला जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भारतीय पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता और अनुप्रयोगों का परीक्षण करना है।

प्रश्न 2: इस कार्यक्रम में कौन से प्रमुख संस्थान शामिल हैं?
उत्तर: IIT-धरवाड़, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, और शिक्षा मंत्रालय का IKS विभाग इस आयोजन के मुख्य स्तंभ हैं।