ब्राजील के महान शिक्षाविद पाउलो फ्रेरे ने 'बैंकिंग मॉडल' की आलोचना करते हुए एक ऐसी शिक्षा पद्धति का प्रस्ताव दिया जो छात्रों को केवल रटने के बजाय दुनिया को समझने और बदलने की शक्ति देती है।
- 'बैंकिंग मॉडल' शिक्षा को केवल सूचनाओं का जमाव मानकर उसकी आलोचना करता है।
- फ्रेरे ने 'समस्या-प्रस्तुति' (Problem-posing) पद्धति का सुझाव दिया जो संवाद पर आधारित है।
- शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मुक्ति होना चाहिए।
पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में अक्सर एक शिक्षक कक्षा में आता है, पाठ पढ़ाता है और छात्र बिना किसी प्रश्न के उसे सुनकर याद कर लेते हैं। ब्राजील के प्रसिद्ध शिक्षाविद और दार्शनिक पाउलो फ्रेरे ने इस प्रक्रिया को 'बैंकिंग मॉडल' (Banking Concept of Education) का नाम दिया है। उनके अनुसार, यह पद्धति छात्रों को केवल 'पात्रों' या 'बर्तनों' की तरह देखती है जिन्हें शिक्षक द्वारा ज्ञान से भर दिया जाता है।
बैंकिंग मॉडल बनाम समस्या-प्रस्तुति दृष्टिकोण
फ्रेरे की प्रसिद्ध पुस्तक 'पेडागॉजी ऑफ द ऑप्रेस्ड' (Pedagogy Of The Oppressed) में उन्होंने तर्क दिया कि बैंकिंग मॉडल यथास्थिति को बनाए रखने का काम करता है। यह छात्रों को आलोचनात्मक सोच विकसित करने से रोकता है और उन्हें मौजूदा व्यवस्था के प्रति अनुकूल बनाने के लिए प्रेरित करता है। इसके विपरीत, फ्रेरे ने 'समस्या-प्रस्तुति' (Problem-posing) दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आज भी भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में रटने वाली शिक्षा पद्धति हावी है। फ्रेरे का मॉडल यह सिखाता है कि शिक्षा केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक वास्तविकता को समझने और उसे बदलने का एक राजनीतिक और सामाजिक उपकरण है।
शिक्षा केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि दुनिया को बदलने के लिए चेतना जगाने की प्रक्रिया है।
पाउलो फ्रेरे का जीवन संघर्षों से भरा था। 1921 में ब्राजील में जन्मे फ्रेरे ने गरीबी और भुखमरी का सामना किया। उनके द्वारा शुरू किया गया 'अंगिकोस का 40 घंटे' (40 Hours of Angicos) कार्यक्रम, जिसने ग्रामीण श्रमिकों को साक्षर बनाया, वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना। हालांकि, 1964 के सैन्य तख्तापलट के बाद उन्हें निर्वासित कर दिया गया, लेकिन उनके विचार कभी समाप्त नहीं हुए।
ऐतिहासिक संदर्भ और प्रभाव
फ्रेरे ने दिखाया कि जब शिक्षक और छात्र संवाद (Dialogue) के माध्यम से एक साथ सीखते हैं, तो सीखने की प्रक्रिया 'ऊर्ध्वाधर पदानुक्रम' (Vertical Hierarchy) को तोड़ देती है। यह पद्धति छात्रों को 'डॉक्स' (सतही ज्ञान) से 'लोगोस' (आलोचनात्मक ज्ञान) की ओर ले जाती है।
| विशेषता | बैंकिंग मॉडल | समस्या-प्रस्तुति मॉडल |
|---|---|---|
| शिक्षक की भूमिका | सूचना प्रदाता (Depositor) | सह-अन्वेषक (Co-investigator) |
| छात्र की भूमिका | निष्क्रिय प्राप्तकर्ता | सक्रिय विचारक |
| मुख्य लक्ष्य | अनुकूलन (Adaptation) | मुक्ति और परिवर्तन (Liberation) |
Frequently Asked Questions
1. 'बैंकिंग मॉडल' क्या है?
यह वह पद्धति है जहाँ शिक्षक छात्रों को निष्क्रिय पात्र मानकर उनमें केवल जानकारी 'जमा' करते हैं।
2. समस्या-प्रस्तुति दृष्टिकोण का क्या लाभ है?
यह छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित करता है और उन्हें अपने सामाजिक परिवेश को समझने और बदलने में सक्षम बनाता है।