प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम को घटाने के लिए माता‑पिता को जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

  • स्क्रीन टाइम बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है
  • शिक्षकों को माता‑पिता के साथ संवाद करना चाहिए
  • शारीरिक खेल और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक

प्रधानमंत्री का संदेश

नई दिल्ली (5 सितंबर 2026) – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ अपने आधिकारिक निवास में हुई बैठक में बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम को रोकने के लिए माता‑पिता को जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम "एक प्रमुख चिंता" बन गया है और शिक्षक इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

स्क्रीन टाइम पर चर्चा क्यों जरूरी है

मोदी ने बताया कि कई बच्चे रात में भी मोबाइल फ़ोन का उपयोग जारी रखते हैं, जिससे नींद में बाधा और शारीरिक विकास में कमी आती है। उन्होंने माता‑पिता को सलाह दी कि वे बच्चों के दैनिक स्क्रीन उपयोग को मॉनिटर करें और सीमित करने के लिए स्पष्ट नियम बनाएं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ संरेखण

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कक्षा के बाहर सीखने, वास्तविक‑विश्व कौशल और काम के अनुभवों को बढ़ावा देना आवश्यक माना गया है। मोदी ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ा सकते, बल्कि बच्चों में श्रम की गरिमा और टीमवर्क जैसी मूल्यों को भी स्थापित करना चाहिए।

शिक्षकों की विस्तारित भूमिका

परिवार संरचना के बदलते स्वरूप को देखते हुए, मोदी ने कहा कि शिक्षक अब छात्रों के व्यवहार, मनोवैज्ञानिक परिवर्तन और दैनिक जीवन पर भी नज़र रखें। यह केवल शैक्षणिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि समग्र विकास का प्रश्न है।

नशे की समस्या पर भी चेतावनी

बैठक में उन्होंने नशे के बढ़ते खतरे को भी उजागर किया और शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे बच्चों में बदलावों को पहचानें, कारणों का पता लगाएँ और उन्हें सही मार्ग पर ले जाने में मदद करें।

पुरस्कार विजेताओं की प्रोफ़ाइल

इस वर्ष 82 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनमें से 48 स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक से, तथा 13 कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के स्किल ट्रेनर हैं। उन्होंने अपने नवाचारपूर्ण शिक्षण‑पद्धतियों और कक्षा को अधिक आकर्षक बनाने के तरीकों को साझा किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में स्क्रीन टाइम पर चर्चा नई नहीं है; 2010 के दशक में कई सरकारी रिपोर्टों ने बच्चों में डिजिटल निर्भरता की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर किया था। 2020 में शुरू हुए राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता अभियान ने डिजिटल उपकरणों के उपयोग को सकारात्मक दिशा में मोड़ने की कोशिश की, लेकिन हाल ही में अभिभावकों की शिकायतें बढ़ी हैं, जिससे इस मुद्दे पर फिर से ध्यान देना आवश्यक हो गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unchecked screen exposure can impair cognitive development and increase mental‑health risks, making teacher‑parent collaboration a critical preventive strategy for India’s next generation.

"स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक परिवर्तन का मुद्दा है," कहा बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अंजली सिंह ने।
Did You Know?: भारत में 10‑12 वर्ष के 60% बच्चों के पास कम से कम एक स्मार्टफ़ोन है, जो वैश्विक औसत से दो गुना अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: स्क्रीन टाइम को सीमित करने के लिए सबसे प्रभावी उपाय क्या हैं?

उत्तर: स्पष्ट समय‑सीमा निर्धारित करना, शाम को डिवाइस बंद करना और वैकल्पिक शारीरिक व रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।

प्रश्न 2: शिक्षक इस पहल में कैसे सहयोग कर सकते हैं?

उत्तर: वे अभिभावक‑समारोह आयोजित करके जागरूकता बढ़ा सकते हैं, नियमित रूप से स्क्रीन उपयोग की रिपोर्ट साझा कर सकते हैं और स्कूल‑स्तर पर डिजिटल डिटॉक्स कार्यक्रम चला सकते हैं।