शिकागो विश्वविद्यालय ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से अपने सोशल साइंस कोर कोर्स में AI, लैपटॉप और स्मार्टफोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम छात्रों को डिजिटल निर्भरता से मुक्त कर गहन सोच और मानवीय संवाद की ओर वापस ले जाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

  • 2026-27 शैक्षणिक सत्र से सोशल साइंस क्लास में लैपटॉप और स्मार्टफोन का उपयोग प्रतिबंधित होगा।
  • AI-आधारित लेखन और ग्रेडिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
  • छात्रों को अब डिजिटल स्क्रीन के बजाय कागज पर छपे टेक्स्ट और हस्तलिखित नोट्स का उपयोग करना होगा।
  • डिसेबिलिटी (दिव्यांगता) और विशिष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए कुछ अपवादों की अनुमति होगी।

दुनिया भर के शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच, शिकागो विश्वविद्यालय (University of Chicago) ने एक क्रांतिकारी और लीक से हटकर निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि 2026-27 शैक्षणिक वर्ष से उसके 'सोशल साइंसेज कोर' पाठ्यक्रमों में तकनीकी उपकरणों का उपयोग सीमित कर दिया जाएगा। इस नई नीति के तहत, छात्रों को कक्षा के दौरान लैपटॉप, स्मार्टफोन और अन्य व्यक्तिगत डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने से रोका जाएगा।

डिजिटल युग में 'एनालॉग' शिक्षा की वापसी

विश्वविद्यालय के सोशल साइंसेज कॉलेजिएट डिवीजन के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कक्षा का वातावरण अब 'एनालॉग' मॉडल पर आधारित होगा। इसका अर्थ है कि छात्र अब डिजिटल रीडिंग के बजाय कागज पर छपे ग्रंथों (Paper Texts) का अध्ययन करेंगे और स्क्रीन के बजाय आमने-सामने होने वाली चर्चाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह निर्णय केवल तकनीक को हटाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों में स्वतंत्र सोच और आलोचनात्मक विश्लेषण की क्षमता विकसित करने के लिए लिया गया है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि AI पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों की मौलिक लेखन और सोचने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। इसलिए, AI-सहायता प्राप्त लेखन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, और प्रोफेसरों को भी ग्रेडिंग के लिए AI का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। पाठ्यक्रम (Syllabus) पूरी तरह से मानव विद्वानों द्वारा तैयार किए जाएंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिकागो विश्वविद्यालय का यह कदम वैश्विक शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। जैसे-जैसे AI शिक्षा के हर पहलू में घुसपैठ कर रहा है, यह प्रयोग यह जांचने का एक तरीका है कि क्या 'मानवीय स्पर्श' और 'गहन अध्ययन' के बिना उच्च शिक्षा का उद्देश्य पूरा हो सकता है। यह फैसला तकनीकी प्रगति और संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी कोशिश है।

तकनीक का उपयोग ज्ञान प्राप्त करने के लिए होना चाहिए, न कि सोचने की प्रक्रिया को प्रतिस्थापित करने के लिए।

अपवाद और लचीलापन

हालांकि यह नीति सख्त दिखती है, लेकिन यह पूरी तरह से तकनीक विरोधी नहीं है। प्रोफेसरों को विशिष्ट शैक्षणिक उद्देश्यों जैसे डेटासेट का विश्लेषण करने, कोड को ठीक करने या लाइब्रेरी संसाधनों तक पहुंचने के लिए तकनीक के उपयोग की अनुमति मांगी जा सकती है। इसके अलावा, जिन छात्रों को दिव्यांगता (Disability) के कारण विशेष सहायता की आवश्यकता है, उन्हें डिजिटल उपकरणों के उपयोग की अनुमति दी जाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक ओर सोशल साइंस में प्रतिबंध लगाया जा रहा है, वहीं विश्वविद्यालय छात्रों को Anthropic के Claude Enterprise का उपयोग करने की सुविधा भी दे रहा है। यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य तकनीक को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि तकनीक का उपयोग कब और कैसे किया जाए।

Did You Know?: शिकागो विश्वविद्यालय की लॉ स्कूल ने भी अगले शैक्षणिक वर्ष से अपने प्रथम वर्ष के कोर पाठ्यक्रमों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह प्रतिबंध सभी विषयों के लिए है?
नहीं, वर्तमान में यह मुख्य रूप से सोशल साइंसेज कोर और लॉ स्कूल के कुछ पाठ्यक्रमों पर लागू होता है।

2. क्या छात्र नोट्स लेने के लिए लैपटॉप का उपयोग कर सकेंगे?
सामान्यतः नहीं, छात्रों को हस्तलिखित नोट्स लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में अनुमति मिल सकती है।