IIT मंडी में भगवद गीता पर आधारित एक विवादित पोस्टर के कारण हंगामा खड़ा हो गया है, जिसमें जातियों के कार्यों का उल्लेख किया गया था। संस्थान के निदेशक ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है।

  • IIT मंडी में 'शूद्र उच्च वर्गों की सेवा करें' वाले पोस्टर पर विवाद।
  • निदेशक लक्ष्मण धीर बेहरा ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई।
  • संस्थान ने जातिगत भेदभाव की कड़ी निंदा की और इसे छात्रों की गलत व्याख्या बताया।

IIT मंडी में हाल ही में आयोजित जन्माष्टमी उत्सव के दौरान एक विवादित पोस्टर के प्रदर्शन ने शैक्षणिक जगत में हलचल पैदा कर दी है। इस पोस्टर में भगवद गीता के संदर्भों का उपयोग करते हुए समाज को चार श्रेणियों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—में विभाजित किया गया था, जिसमें शूद्रों के लिए 'उच्च वर्गों की सेवा करना' शब्द का प्रयोग किया गया था।

संस्थान के निदेशक, लक्ष्मण धीर बेहरा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे छात्रों द्वारा शास्त्रों की गलत व्याख्या बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक छात्र-आधारित कार्यक्रम था और संस्थान का इस तरह के किसी भी भेदभावपूर्ण संदेश से कोई लेना-देना नहीं है। बेहरा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक और सामाजिक व्याख्याओं का समावेश संवेदनशील विषय है। जब शैक्षणिक परिसर में जातिगत पदानुक्रम का संकेत देने वाले संदेश दिखाई देते हैं, तो यह न केवल सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करता है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांतों को भी चुनौती देता है।

संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के साथ सामंजस्य बनाए रखें।

विवादित पोस्टर में कहा गया था कि ब्राह्मणों का कार्य 'ईश्वर का संदेश फैलाना' है, जबकि शूद्रों का कार्य 'उच्च वर्गों की सेवा' करना है। इस प्रकार के चित्रण ने कैंपस में हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है। निदेशक ने ईमेल के माध्यम से संस्थान के समुदाय को आश्वस्त किया कि वे समानता और सामाजिक न्याय के संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

यह उल्लेखनीय है कि निदेशक बेहरा का स्वयं का ISKCON और भगवद गीता की शिक्षाओं के साथ गहरा संबंध है। उन्होंने तर्क दिया कि ISKCON जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करता है। हालांकि, उनके पिछले कुछ बयान भी चर्चा का विषय रहे हैं, जिसमें उन्होंने जानवरों के प्रति क्रूरता को प्राकृतिक आपदाओं से जोड़ा था।

Did You Know?: भारत के संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता (un-touchability) का उन्मूलन करता है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास दंडनीय अपराध है।

Frequently Asked Questions

1. IIT मंडी ने इस विवाद पर क्या कदम उठाए हैं?
निदेशक ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है जिसमें विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

2. विवादित पोस्टर में क्या लिखा था?
पोस्टर में समाज को चार वर्णों में विभाजित किया गया था और शूद्रों की भूमिका को 'उच्च वर्गों की सेवा' के रूप में वर्णित किया गया था।