बेंगलुरु की 17 वर्षीय मिहिरा गुजराल ने अपने घर के बाहर 'कथा घर' नामक एक छोटी मुफ्त लाइब्रेरी स्थापित की है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल दुनिया से निकालकर किताबों की दुनिया से जोड़ना है।

  • 17 वर्षीय मिहिरा गुजराल ने कोरामंगला में 'कथा घर' नामक मुफ्त पुस्तकालय शुरू किया।
  • इसकी प्रेरणा अमेरिका में देखी गई एक फ्री लाइब्रेरी से मिली।
  • यह पुस्तकालय अब दिल्ली स्थित 'फ्री लाइब्रेरीज़ नेटवर्क' का हिस्सा है।
  • इसका लक्ष्य डिजिटल स्क्रीन से ध्यान हटाकर पढ़ने की आदत डालना है।

बेंगलुरु के कोरामंगला प्रथम ब्लॉक में एक छोटी सी झोपड़ी के आकार की लकड़ी की संरचना शहर के निवासियों के लिए ज्ञान का नया स्रोत बन गई है। मिहिरा गुजराल, जो एक निजी स्कूल की 17 वर्षीय छात्रा हैं, ने अपने पिता समीर गुजराल के साथ मिलकर इस अद्भुत पहल की शुरुआत की है, जिसे उन्होंने 'कथा घर' नाम दिया है।

इस अभिनव विचार की उत्पत्ति एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान हुई। मिहिरा ने बताया कि जब वह अपने पिता के साथ अमेरिका में एक ट्रेक पर थीं, तब उन्होंने एक घर के सामने एक मुफ्त पुस्तकालय देखा। उस अनुभव ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में बेंगलुरु में इसी तरह की एक इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि आज के डिजिटल युग में, जहाँ स्मार्टफोन की लत बढ़ती जा रही है, मिहिरा जैसे युवाओं द्वारा की गई ऐसी पहल सामुदायिक शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल किताबों तक पहुंच प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक असमानता को कम करने में भी मदद करती है।

किताबों का यह छोटा सा कोना समाज में पढ़ने की संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कथा घर केवल किताबों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक विचार है। मिहिरा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को मोबाइल पर बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने से रोकना और उन्हें वास्तविक ज्ञान की ओर मोड़ना है। शुरुआत में यह केवल फिक्शन (कथा साहित्य) तक सीमित था, लेकिन अब इसमें विभिन्न विषयों की किताबें शामिल हैं। वर्तमान में, इस बॉक्स में एक समय में 35 से 40 किताबें रखी जा सकती हैं।

मिहिरा ने एक मार्मिक अनुभव साझा किया कि कैसे एक क्विक-कॉमर्स डिलीवरी पार्टनर ने किताब पढ़ने में संकोच किया क्योंकि उन्हें डर था कि उनके साथी उनका मजाक उड़ाएंगे। यह घटना दर्शाती है कि समाज में पढ़ने की आदत के प्रति अभी भी कितनी रूढ़ियाँ मौजूद हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मुफ्त पुस्तकालयों (Free Libraries) की अवधारणा सदियों पुरानी है, जिसका उद्देश्य ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करना था। भारत में भी, सार्वजनिक पुस्तकालयों ने स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधारों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मिहिरा की यह पहल इसी समृद्ध परंपरा का आधुनिक और सामुदायिक स्वरूप है।

Did You Know?: कथा घर अब दिल्ली स्थित 'फ्री लाइब्रेरीज़ नेटवर्क' का एक पंजीकृत सदस्य है, जो सूचना तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या कथा घर की किताबें वास्तव में मुफ्त हैं?
हाँ, ये किताबें पूरी तरह से मुफ्त हैं। कोई भी व्यक्ति इन्हें पढ़ सकता है और वापस कर सकता है।

प्रश्न 2: क्या इस लाइब्रेरी का विस्तार हो रहा है?
हाँ, केरल के त्रिशूर में एक और इकाई स्थापित की जा चुकी है और दिल्ली व गुरुग्राम में भी विस्तार की योजना है।