सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने साहित्य को सत्य के सबसे करीब बताया और कहा कि यह मौजूदा व्यवस्था की कठोरताओं को चुनौती देने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।

  • साहित्य समाज को यथास्थिति और कठोर प्रणालियों पर सवाल उठाने की शक्ति देता है।
  • विविधता भारत की आत्मा है और एकता ही देश की वास्तविक ताकत है।
  • सोशल मीडिया और रील्स ने शब्दों की शक्ति को और अधिक बढ़ा दिया है, जो सरकारों को भी प्रभावित करता है।

पला के अल्फोंसा कॉलेज में स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित तीसरे रेव. डॉ जोसे जोसेफ पुलावेलिल स्मृति व्याख्यान के दौरान, सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने साहित्य, भाषा और लोकतंत्र के अंतर्संबंधों पर गहरा प्रकाश डाला। "शब्द की शक्ति" विषय पर बोलते हुए उन्होंने तर्क दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह सत्य के उस संस्करण तक पहुँच प्रदान करता है जो अक्सर आधिकारिक विमर्शों में दबा दिया जाता है।

कनिमोझी ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य समाज को मौजूदा व्यवस्था की कठोरताओं और रूढ़ियों पर सवाल उठाने के लिए सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि जब समाज किसी विशेष विचारधारा या व्यवस्था में जकड़ जाता है, तब साहित्य ही वह उपकरण होता है जो नए दृष्टिकोण प्रदान करता है और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that in an era of increasing polarization, the emphasis on literature as a tool for democratic questioning is crucial. By linking classical literary figures with modern digital tools, the discourse bridges the gap between traditional intellectualism and contemporary activism, suggesting that the 'word' remains the ultimate catalyst for social change.

मलयालम के महान साहित्यकारों एझुथाचन और कुंजन नंबियार का उदाहरण देते हुए, सांसद ने बताया कि उनकी कविताएं केवल कला नहीं थीं, बल्कि उनमें तत्कालीन राजनीति और सत्ता की गहरी समझ और आलोचना निहित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य हमेशा से सत्ता के समानांतर एक दर्पण रहा है।

साहित्य वह मशाल है जो समाज के अंधेरे कोनों को उजागर करता है और सत्ता को उसकी जवाबदेही याद दिलाता है।

वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज शब्दों की शक्ति सोशल मीडिया और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो (रील्स) के माध्यम से कई गुना बढ़ गई है। यह डिजिटल क्रांति अब सरकारों को भी विचलित करने और उन्हें जवाबदेह बनाने की क्षमता रखती है, जो कला की समाज को बदलने की शक्ति का प्रमाण है।

कनिमोझी ने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल व्यावसायिक सफलता के पीछे न भागें, बल्कि साहित्य और कला के माध्यम से एक समृद्ध जीवन जिएं। उन्होंने कहा कि कला के प्रति झुकाव ही उन्हें समाज को बेहतर ढंग से समझने और स्थापित मानदंडों को चुनौती देने की बौद्धिक क्षमता प्रदान करेगा।

क्या आप जानते हैं?: एझुथाचन को मलयालम साहित्य का 'आदि कवि' माना जाता है, जिन्होंने रामायण का अनुवाद कर ज्ञान को आम जनता तक पहुँचाया।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कनिमोझी करुणानिधि के अनुसार साहित्य की मुख्य भूमिका क्या है?
उत्तर: उनके अनुसार, साहित्य समाज को सत्य के करीब लाता है और उसे स्थापित मानदंडों और व्यवस्था की कठोरताओं पर सवाल उठाने के लिए सशक्त बनाता है।

प्रश्न 2: डिजिटल युग में शब्दों की शक्ति पर उनका क्या विचार है?
उत्तर: उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और रील्स ने शब्दों के प्रभाव को बढ़ा दिया है, जिससे अब आम नागरिक की आवाज़ सरकारों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच रही है।