दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने VIT वेल्लोर के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का केवल उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि इसे बनाने वाला देश बनना चाहिए। उन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर दिया।

  • भारत को AI तकनीक का उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता (Creator) बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • प्रधानमंत्री मोदी के 'इंडिया AI मिशन' के माध्यम से सेमीकंडक्टर और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है।
  • उच्च शिक्षा में भारत का नामांकन अनुपात (GER) अभी केवल 30% है, जिसे 50% तक ले जाने का लक्ष्य है।
  • चिकित्सा शिक्षा में सीटों की भारी कमी है, जिसके कारण हर साल लाखों छात्र विदेश जा रहे हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने VIT वेल्लोर के 41वें दीक्षांत समारोह के दौरान एक प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने graduating छात्रों से आह्वान किया कि वे केवल तकनीक का उपयोग करने वाले न बनें, बल्कि भारत के अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करें। गुप्ता ने जोर देकर कहा कि भविष्य में देश की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि हम तकनीक को कितनी कुशलता से 'डिजाइन' और 'बनाते' हैं।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 'इंडिया AI मिशन' के माध्यम से सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, अंतरिक्ष, ड्रोन, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही है। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे इन अवसरों का लाभ उठाएं और देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए नवाचार का उपयोग करें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर AI की दौड़ में भारत की स्थिति महत्वपूर्ण मोड़ पर है। यदि भारत केवल सॉफ्टवेयर सेवाओं का उपयोग करता रहता है, तो वह तकनीकी संप्रभुता खो सकता है। 'मेक इन इंडिया' को अब 'डिजाइन इन इंडिया' और 'बिल्ड इन इंडिया' के स्तर पर ले जाने की आवश्यकता है ताकि वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में भारत का दबदबा बना रहे।

"भारत को केवल एआई का उपयोग करने वाला नहीं, बल्कि एआई का निर्माता बनना होगा ताकि हम वैश्विक तकनीकी नेतृत्व कर सकें।"

समारोह के दौरान, VIT के चांसलर जी विश्वनाथन ने उच्च शिक्षा की गंभीर चुनौतियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत का उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्तमान में लगभग 30% है, जबकि दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में यह 60% से 90% के बीच है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के माध्यम से इसे 50% तक बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

विश्वनाथन ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े संकट की ओर भी इशारा किया। उन्होंने डेटा साझा करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 22 लाख छात्र NEET परीक्षा देते हैं, लेकिन उपलब्ध चिकित्सा सीटें केवल 1.3 लाख के आसपास हैं। इस भारी अंतर के कारण, हर साल लगभग 1 लाख भारतीय छात्र चिकित्सा की पढ़ाई के लिए रूस, चीन और फिलीपींस जैसे देशों का रुख करते हैं।

चिकित्सा शिक्षा और नामांकन तुलना

देश/क्षेत्रनामांकन अनुपात (GER)चिकित्सा सीटों की स्थिति
भारत~30%भारी कमी (प्रति वर्ष 22 लाख आवेदक)
दक्षिण कोरिया~90%उच्च उपलब्धता
चीन>60%प्रति संस्थान उच्च क्षमता
जापान~60%उच्च उपलब्धता

अंत में, चांसलर ने राज्यों और राज्यपालों के बीच विश्वविद्यालय नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवादों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वे शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समन्वय स्थापित करें ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

Did You Know?: भारत में प्रति वर्ष लगभग 1 लाख छात्र चिकित्सा की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं क्योंकि देश में पर्याप्त मेडिकल सीटें उपलब्ध नहीं हैं।

Frequently Asked Questions

1. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छात्रों को क्या सलाह दी?
उन्होंने छात्रों को केवल AI का उपयोग करने के बजाय भारत के लिए स्वयं AI तकनीक विकसित करने और नवाचार के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की सलाह दी।

2. भारत में चिकित्सा शिक्षा की मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या सीटों की भारी कमी है; जहाँ 22 लाख छात्र परीक्षा देते हैं, वहीं केवल 1.3 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं।