केंद्र सरकार ने अंग्रेजी को स्वदेशी भाषा के रूप में वर्गीकृत करने पर असहमति जताई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि कक्षा 6 के छात्रों को अनिवार्य तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छूट देने पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
- केंद्र तीन-भाषा फॉर्मूले में अंग्रेजी को 'देशी' या स्वदेशी भाषा मानने के खिलाफ है।
- सुप्रीम कोर्ट कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 10 की अनिवार्य तीसरी भाषा परीक्षा से एकमुश्त छूट देने पर विचार कर रहा है।
- अदालत ने बुनियादी ढांचे में सुधार और योजना को कम कक्षाओं से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत के शैक्षिक ढांचे से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले में, केंद्र सरकार 9 सितंबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने हुई इस सुनवाई में भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी की भाषाई पहचान को लेकर एक वैचारिक टकराव सामने आया।
केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को अंग्रेजी को स्वदेशी भाषा के रूप में मानने पर "आपत्ति" है। यह बहस तब शुरू हुई जब याचिकाकर्ताओं ने अंग्रेजी को "गैर-देशी" या विदेशी भाषा की श्रेणी में डालने की मांग की, ताकि तीन-भाषा फॉर्मूले के कार्यान्वयन में बदलाव किया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल शैक्षणिक नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक पहचान से जुड़ा है। अंग्रेजी को 'देशी' लेबल देने से इनकार कर केंद्र सरकार औपनिवेशिक भाषाई विरासत और स्वदेशी भाषाओं के बीच अंतर को स्पष्ट कर रही है, जिसका सीधा असर विभिन्न बोर्डों में क्रेडिट और अनिवार्य आवश्यकताओं पर पड़ेगा।
भाषाई विवाद के अलावा, अदालत छात्रों पर पड़ने वाले व्यावहारिक बोझ को लेकर चिंतित है। CBSE के वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार, कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों को छूट दी गई थी, लेकिन वर्तमान कक्षा 6 बैच को पूर्ण कार्यान्वयन का सामना करना था, जिसमें 2031 तक तीसरी भाषा में अनिवार्य कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा शामिल है। इस विसंगति ने अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भारी चिंता पैदा कर दी है।
बहुभाषी पाठ्यक्रम की ओर संक्रमण क्रमिक और बुनियादी ढांचे पर आधारित होना चाहिए, न कि एक अचानक थोपा गया आदेश जो छात्रों के एक विशिष्ट बैच को दंडित करे।
जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि हालांकि मातृभाषा, फिर एक स्वदेशी भाषा और उसके बाद एक अन्य स्वदेशी या विदेशी भाषा से शुरू होने वाली तीन-भाषा योजना एक अच्छी नीति है, लेकिन इसे कम उम्र की कक्षाओं से शुरू किया जाना चाहिए। अदालत का तर्क है कि उच्च कक्षाओं में इसे शुरू करने से बच्चों को ढलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।
अदालत ने अब तीन मुख्य बिंदुओं पर स्पष्टता मांगी है: कक्षा 6 के छात्रों को एकमुश्त छूट देने की संभावना, मांग को पूरा करने के लिए मानव संसाधन (शिक्षकों) का निर्माण, और योजना को प्राथमिक कक्षाओं से शुरू करने की व्यवहार्यता।
| छात्र समूह | वर्तमान स्थिति | संभावित आवश्यकता |
|---|---|---|
| कक्षा 7-9 | छूट प्राप्त | कोई अनिवार्य तीसरी भाषा बोर्ड परीक्षा नहीं |
| कक्षा 6 (वर्तमान) | विचाराधीन | 2031 तक अनिवार्य बोर्ड परीक्षा (यदि छूट न मिली) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. केंद्र अंग्रेजी को देशी भाषा मानने का विरोध क्यों कर रहा है?
सरकार अंग्रेजी को एक विदेशी/औपनिवेशिक भाषा मानती है और उसका मानना है कि तीन-भाषा ढांचे में प्राथमिक 'देशी' दर्जा स्वदेशी भाषाओं का होना चाहिए।
2. कक्षा 6 के छात्रों के लिए किस 'छूट' की चर्चा हो रही है?
अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को अनावश्यक शैक्षणिक दबाव से बचाने के लिए कक्षा 10 की अनिवार्य तीसरी भाषा परीक्षा से मुक्त रखा जाना चाहिए।