OECD की PISA 2025 रिपोर्ट के अनुसार, होमवर्क और रिसर्च के लिए AI पर अत्यधिक निर्भर रहने वाले छात्रों के स्कोर में भारी गिरावट आई है। विशेष रूप से विज्ञान, गणित और पढ़ने के कौशल में वैश्विक स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है।

  • AI का उपयोग कर सारांश बनाने और ड्राफ्टिंग करने वाले छात्रों के विज्ञान स्कोर में 20 अंकों की कमी आई।
  • 2015 से 2025 के बीच OECD देशों में रीडिंग स्कोर 28 अंक और गणित स्कोर 22 अंक गिर गए।
  • 'जल्दबाजी में पढ़ने वाले' (Hasty Readers) छात्रों की संख्या 2018 के बाद लगभग दोगुनी हो गई है।
  • AI का संतुलित उपयोग और आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) बेहतर प्रदर्शन की कुंजी है।

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा जारी PISA 2025 के नवीनतम परिणामों ने वैश्विक शिक्षा प्रणाली के सामने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। 91 देशों के लगभग 760,000 15 वर्षीय छात्रों के मूल्यांकन से पता चला है कि तकनीक का बढ़ता हस्तक्षेप, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमताओं को प्रभावित कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, जो छात्र अपने स्कूल के कार्यों जैसे कि पाठ का सारांश तैयार करने, प्रारंभिक शोध करने या असाइनमेंट लिखने के लिए AI चैटबॉट्स का सहारा लेते हैं, उनका प्रदर्शन उन छात्रों की तुलना में काफी कम रहा जिन्होंने AI का उपयोग नहीं किया। विज्ञान के क्षेत्र में यह अंतर लगभग 20 अंकों का पाया गया, जो शैक्षिक रूप से लगभग एक वर्ष की स्कूली शिक्षा के नुकसान के बराबर है।

पढ़ने की क्षमता में वैश्विक गिरावट

AI के प्रभाव से परे, रिपोर्ट एक और चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है: पढ़ने के कौशल में भारी गिरावट। पिछले दशक (2015-2025) में, OECD देशों में रीडिंग स्कोर में 28 अंकों की कमी आई है। समस्या केवल यह नहीं है कि छात्र कम पढ़ रहे हैं, बल्कि यह है कि वे अब 'सतही पाठक' बन गए हैं। 2018 और 2025 के बीच ऐसे छात्रों की संख्या दोगुनी हो गई है जो तेजी से पढ़ते तो हैं, लेकिन सही उत्तर देने में विफल रहते हैं।

"सीखने की प्रक्रिया में मानसिक प्रयास अनिवार्य है; जब AI सोचने की प्रक्रिया को प्रतिस्थापित कर देता है, तो आलोचनात्मक सोच और विश्लेषण क्षमताएं समाप्त होने लगती हैं।"

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति केवल ग्रेड्स के बारे में नहीं है, बल्कि भविष्य की कार्यबल क्षमता के बारे में है। जब छात्र सूचनाओं का मूल्यांकन करने और विचारों को जोड़ने की क्षमता खो देते हैं, तो वे गलत सूचनाओं और AI-जनित भ्रमों (Hallucinations) के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। भारतीय कक्षाओं के लिए यह एक चेतावनी है कि तकनीक को 'सोचने के विकल्प' के रूप में नहीं, बल्कि 'सोचने के सहायक' के रूप में अपनाया जाए।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि AI अपने आप में विलेन नहीं है। जो छात्र AI का उपयोग संतुलित तरीके से करते हैं और जिन्हें AI-जनित जानकारी की गुणवत्ता का आकलन करना सिखाया गया है, वे अक्सर बेहतर प्रदर्शन करते हैं। अंतर इस बात में है कि AI छात्र की सोच को सहारा दे रहा है या उसे पूरी तरह बदल रहा है।

कौशल/क्षेत्र गिरावट (OECD देश) प्रभाव का कारण
रीडिंग (Reading) -28 अंक सतही पठन और कम एकाग्रता
गणित (Maths) -22 अंक तार्किक सोच में कमी
विज्ञान (Science) -20 अंक (AI यूजर्स) AI पर अत्यधिक निर्भरता
क्या आप जानते हैं?: PISA (Programme for International Student Assessment) दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित शैक्षिक मूल्यांकन है जो हर तीन साल में छात्रों की वास्तविक दुनिया में ज्ञान लागू करने की क्षमता को मापता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या छात्रों को AI का उपयोग पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
नहीं, रिपोर्ट के अनुसार संतुलित उपयोग और AI-साक्षरता (गुणवत्ता की जांच करना) वास्तव में प्रदर्शन में सुधार कर सकती है।

प्रश्न 2: 'Hasty Readers' से क्या तात्पर्य है?
ये वे छात्र हैं जो पाठ को बहुत जल्दी पढ़ते हैं लेकिन उसकी गहराई को नहीं समझते, जिससे वे गलत उत्तर देते हैं।