SRM यूनिवर्सिटी-एपी ने शोध पत्रों के प्रकाशन शुल्क (APC) को कवर करने के लिए स्प्रिंगर नेचर के साथ एक समझौता किया है, ताकि विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को वैश्विक पहचान मिल सके।

  • SRM यूनिवर्सिटी-एपी अब पात्र शोध पत्रों के लिए आर्टिकल प्रोसेसिंग शुल्क (APC) का भुगतान करेगी।
  • यह साझेदारी 'गोल्डन ओपन एक्सेस' मॉडल का पालन करती है, जिससे शोध तुरंत और मुफ्त उपलब्ध होगा।
  • इस समझौते में नेचर पार्टनर जर्नल्स, BMC और साइंटिफिक रिपोर्ट्स जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशन शामिल हैं।

वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए, SRM यूनिवर्सिटी-एपी ने दुनिया के अग्रणी शोध और शैक्षिक प्रकाशकों में से एक, स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) के साथ एक व्यापक ओपन एक्सेस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार विनायक कल्लूरी और स्प्रिंगर नेचर के प्रतिनिधियों, जिनमें लाइसेंसिंग मैनेजर रजनीश अप्पैया और नीरज करंदीकर शामिल थे, की उपस्थिति में औपचारिक रूप दिया गया।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर करना है। नए नियमों के तहत, विश्वविद्यालय अपने संकाय और विद्वानों द्वारा लिखे गए पात्र शोध लेखों के लिए आर्टिकल प्रोसेसिंग शुल्क (APC) का वहन करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उच्च गुणवत्ता वाला शोध 'पेवॉल' (Paywall) के पीछे न रहे और दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए मुफ्त में उपलब्ध हो।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम SRM यूनिवर्सिटी-एपी द्वारा अपने h-इंडेक्स और उद्धरण (citation) counts को बढ़ाने का एक सोचा-समझा प्रयास है। 'गोल्डन ओपन एक्सेस' मॉडल को अपनाकर, शोध जनता के लिए तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे पारंपरिक सदस्यता मॉडल की तुलना में अधिक दृश्यता और उद्धरण मिलते हैं। यह बदलाव विश्वविद्यालय की एक क्षेत्रीय शैक्षिक केंद्र से वैश्विक शोध पावरहाउस बनने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

ओपन एक्सेस अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि उन विश्वविद्यालयों के लिए आवश्यकता है जो वास्तविक दुनिया पर प्रभाव डालना चाहते हैं।

इस समझौते में BMC, स्प्रिंगर और अत्यंत प्रतिष्ठित नेचर पार्टनर जर्नल्स सहित पत्रिकाओं का एक विशाल पोर्टफोलियो शामिल है। यूनिवर्सिटी सेंट्रल लाइब्रेरी द्वारा आयोजित एक सत्र के दौरान, प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि हालांकि फंडिंग मॉडल बदल गया है, लेकिन कठोर संपादकीय और सहकर्मी-समीक्षा (peer-review) प्रक्रियाएं अपरिवर्तित रहेंगी। यह समझौता केवल तभी प्रभावी होगा जब किसी पांडुलिपि को उसकी वैज्ञानिक योग्यता के आधार पर औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा।

ऐतिहासिक रूप से, शैक्षणिक प्रकाशन 'पे-टू-रीड' मॉडल द्वारा संचालित रहे हैं, जहाँ पुस्तकालयों और व्यक्तियों को भारी सदस्यता शुल्क देना पड़ता था। SRM यूनिवर्सिटी-एपी जैसे संस्थानों द्वारा ओपन एक्सेस की दिशा में उठाया गया यह कदम ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि जीवन रक्षक वैज्ञानिक डेटा और मानविकी अनुसंधान सभी के लिए उपलब्ध हों।

क्या आप जानते हैं?: 'गोल्डन ओपन एक्सेस' मॉडल इसलिए अलग है क्योंकि यह प्रकाशन के तुरंत बाद प्रकाशक की वेबसाइट पर लेख के अंतिम संस्करण को मुफ्त में उपलब्ध कराता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या इस समझौते से पत्रिकाओं की सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया बदल जाएगी?
नहीं, संपादकीय और पीयर-रिव्यू प्रक्रियाएं पूरी तरह से स्वतंत्र और अपरिवर्तित रहेंगी; यह समझौता केवल स्वीकृति के बाद प्रकाशन शुल्क के भुगतान से संबंधित है।

प्रश्न 2: इस समझौते के तहत कौन सी पत्रिकाएं कवर की गई हैं?
इसमें साइंटिफिक रिपोर्ट्स, BMC और नेचर पार्टनर जर्नल्स सहित स्प्रिंगर नेचर के कई प्रतिष्ठित प्रकाशन शामिल हैं।