गुजरात सरकार ने निजी सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए नया संशोधन विधेयक पारित किया है। इस कानून के तहत अवैध नियुक्तियों और बिना पंजीकरण स्कूल चलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।

  • निजी सहायता प्राप्त स्कूल अब गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1972 के दायरे में आएंगे।
  • बिना पंजीकरण स्कूल चलाने पर 2 साल की जेल और 15 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान।
  • अवैध शिक्षक या प्रधानाचार्य की नियुक्ति पर प्रशासकों को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा।
  • भर्ती प्रक्रिया में राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पूर्ण कार्यान्वयन अनिवार्य किया गया है।

अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 को बहुमत से पारित कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य के शिक्षा ढांचे में पारदर्शिता लाना और निजी सहायता प्राप्त स्कूलों की जवाबदेही तय करना है।

इस विधेयक के माध्यम से अब सरकारी सहायता प्राप्त निजी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों को गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1972 के दायरे में लाया गया है। इसका अर्थ है कि इन संस्थानों को अब राज्य सरकार के कड़े नियमों और मानकों का पालन करना होगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित हो सके।

सख्त दंड और जुर्माने का प्रावधान

सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर दंड की राशि में भारी वृद्धि की है। पहले, बिना पंजीकरण के स्कूल चलाने या अवैध नियुक्तियों के लिए जुर्माना मामूली था, लेकिन अब इसे काफी बढ़ा दिया गया है। यदि कोई स्कूल बिना पंजीकरण के संचालित पाया जाता है, तो प्रशासक को दो साल की कैद और 15 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

इसी तरह, सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों या प्रधानाचार्यों की अवैध नियुक्ति करने पर प्रशासकों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो पहले केवल 1,000 रुपये था। इसके अलावा, यदि कोई स्कूल बोर्ड को छह महीने का पूर्व नोटिस दिए बिना बंद किया जाता है, तो जुर्माना राशि 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम शिक्षा क्षेत्र में 'पॉलिसी पैरालिसिस' को खत्म करने और निजी संस्थानों के मनमाने रवैये पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है। विशेष रूप से आरक्षण नीति का सख्ती से पालन यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में सामाजिक समावेशिता बनी रहे।

"यह संशोधन केवल दंड के बारे में नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और समावेशिता लाने का एक व्यापक प्रयास है।"

समावेशी शिक्षा और भर्ती नियम

विधेयक में विशेष रूप से सक्षम छात्रों के लिए विशेष शिक्षकों (Special Educators) की भर्ती का प्रावधान किया गया है। सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता और चयन प्रक्रिया अब पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी। वहीं, गैर-अनुदानित (Non-granted) स्कूलों के मामले में, सरकार केवल न्यूनतम योग्यता तय करेगी।

उल्लंघन का प्रकार पुराना जुर्माना नया प्रस्तावित जुर्माना
अवैध नियुक्ति ₹ 1,000 ₹ 10 लाख
बिना पंजीकरण स्कूल चलाना न्यूनतम ₹ 15 लाख + 2 वर्ष जेल
बिना नोटिस स्कूल बंद करना ₹ 1,000 ₹ 20 लाख
क्या आप जानते हैं?: गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा अधिनियम मूल रूप से 1972 में लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्य में स्कूली शिक्षा को विनियमित करना था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह कानून सभी निजी स्कूलों पर लागू होता है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से सरकारी सहायता प्राप्त (Aided) निजी स्कूलों पर लागू होता है, जबकि गैर-अनुदानित स्कूलों के लिए केवल योग्यता संबंधी नियम लागू होंगे।

प्रश्न 2: आरक्षण नीति का इस बिल से क्या संबंध है?
उत्तर: अब सहायता प्राप्त स्कूलों में स्टाफ की भर्ती के दौरान राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन करना अनिवार्य होगा।