बेंगलुरु में आयोजित एक परामर्श बैठक में विशेषज्ञों और छात्रों ने NEET-UG में व्यापक सुधारों की मांग की है, जिसमें बोर्ड परीक्षा के अंकों को वेटेज देना और साल में दो बार परीक्षा आयोजित करना शामिल है। ये सुझाव नंदन निलेकणी की अध्यक्षता वाले उच्च स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपे जाएंगे।
- NEET रैंकिंग के लिए II PU (12वीं) के अंकों को वेटेज देने का सुझाव।
- JEE की तर्ज पर साल में कई बार परीक्षा आयोजित करने और प्रयासों की संख्या सीमित करने की मांग।
- प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए AI तकनीक और विषय विशेषज्ञों के उपयोग पर जोर।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति और डिजिटल ट्रांसमिशन के जरिए धोखाधड़ी रोकने का प्रस्ताव।
बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (ISEC) में सेंटर फॉर एजुकेशनल एंड सोशल स्टडीज (CESS) द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक में NEET-UG परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन के सुझाव दिए गए। इस चर्चा में शिक्षाविदों, चिकित्सा विशेषज्ञों और छात्रों ने हिस्सा लिया, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है।
बैठक में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने तर्क दिया कि जहां JEE कंप्यूटर आधारित है और उसमें कई अवसर मिलते हैं, वहीं NEET की वर्तमान प्रणाली छात्रों पर अत्यधिक दबाव डालती है। उन्होंने सुझाव दिया कि NEET को भी मल्टीपल अटेम्प्ट्स मॉडल पर लाया जाना चाहिए ताकि छात्रों को अपनी गलतियों को सुधारने का मौका मिले।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, NEET केवल एक प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के करियर का निर्णायक मोड़ बन गई है। वर्तमान 'एक मौका, एक परीक्षा' की प्रणाली छात्रों में मानसिक तनाव और कोचिंग माफिया के प्रभाव को बढ़ाती है। यदि II PU अंकों को शामिल किया जाता है, तो यह केवल एक दिन के प्रदर्शन के बजाय दो साल की निरंतर शैक्षणिक मेहनत को मान्यता देगा।
नेशनल मेडिकल कमीशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष एम.के. रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि NEET परीक्षा को बोर्ड परीक्षाओं के एक सप्ताह के भीतर आयोजित किया जाना चाहिए। इससे छात्रों का तनाव कम होगा और वे अपनी तैयारी के प्रवाह को बनाए रख सकेंगे। उन्होंने UPSC की तर्ज पर प्रयासों की एक निश्चित सीमा (Capping) तय करने का भी सुझाव दिया।
"प्रवेश परीक्षाओं में केवल अंकों की दौड़ नहीं, बल्कि छात्र की क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन होना अनिवार्य है।"
तकनीकी सुरक्षा पर चर्चा करते हुए नारायणा हेल्थ के संस्थापक डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने बायोमेट्रिक उपस्थिति की वकालत की ताकि परीक्षा में प्रतिरूपण (Impersonation) जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। वहीं, राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति भगवन बी.सी. ने प्रश्न पत्रों के डिजिटल ट्रांसमिशन के माध्यम से लॉजिस्टिक जोखिमों को कम करने का सुझाव दिया।
छात्रों ने प्रश्न पत्रों के मानकीकरण (Standardisation) की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक विषय का पेपर कठिन है, तो दूसरे का सरल होना चाहिए ताकि समग्र संतुलन बना रहे और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो। इसके साथ ही, NIMHANS के एक मनोचिकित्सक ने माता-पिता द्वारा बच्चों पर डाले जाने वाले अनुचित दबाव के प्रति आगाह किया।
| विशेषता | वर्तमान NEET प्रणाली | प्रस्तावित सुधार |
|---|---|---|
| परीक्षा आवृत्ति | वर्ष में एक बार | वर्ष में दो या अधिक बार |
| रैंकिंग आधार | केवल NEET स्कोर | NEET + II PU बोर्ड स्कोर |
| सुरक्षा | पारंपरिक निगरानी | बायोमेट्रिक और डिजिटल ट्रांसमिशन |
| प्रश्न निर्माण | अस्पष्ट प्रक्रिया | AI और विषय विशेषज्ञों द्वारा मानकीकृत |
Frequently Asked Questions
1. क्या II PU स्कोर को शामिल करने से बोर्ड परीक्षाओं का महत्व बढ़ेगा?
हाँ, इससे छात्र केवल प्रवेश परीक्षा के बजाय अपनी नियमित स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे।
2. क्या NEET परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जा सकती है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि JEE की तरह इसे मल्टीपल अटेम्प्ट्स मॉडल पर लाया जा सकता है, जिससे छात्रों का तनाव कम होगा।