अलीगढ़ के अतरौली में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के क्षेत्र के एक प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने जर्जर इमारत और सांपों के डर से कक्षाओं का बहिष्कार किया। यह घटना राज्य में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे की गंभीर स्थिति को उजागर करती है।
- अतरौली के भमोरी खुर्द गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों ने जर्जर बुनियादी ढांचे के खिलाफ प्रदर्शन किया।
- स्कूल की बीम टूटी हुई है और परिसर में जहरीले सांपों का खतरा बना रहता है।
- शिक्षकों द्वारा बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की।
- यह विरोध प्रदर्शन बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के अपने विधानसभा क्षेत्र में हुआ है।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहां शिक्षा के मंदिर अब बच्चों के लिए डर का केंद्र बन गए हैं। अतरौली विधानसभा क्षेत्र के भमोरी खुर्द गांव स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के छोटे बच्चों, जिन्हें 'जेन-अल्फा' कहा जाता है, ने अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने से इनकार कर दिया है। बच्चों ने स्कूल परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट किया कि वे ऐसी इमारत में नहीं बैठेंगे जो कभी भी उनके सिर पर गिर सकती है।
जब मीडिया की टीम ने मौके का मुआयना किया, तो स्थिति और भी भयावह पाई गई। स्कूल के कमरों की छत को सहारा देने वाली मुख्य बीम पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। दीवारों का प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि इमारत किसी भी समय ढह सकती है। इसके अलावा, स्कूल परिसर रखरखाव के अभाव में जंगली झाड़ियों में तब्दील हो चुका है, जिसके कारण वहां जहरीले सांपों का डेरा है। छात्रों का आरोप है कि पढ़ाई के दौरान सांपों का दिखना अब एक आम बात हो गई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह घटना केवल एक स्कूल की बदहाली नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। यह तथ्य कि यह प्रदर्शन बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुआ है, शासन की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब मंत्री के अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा इस स्तर तक गिर सकता है, तो राज्य के दूरदराज के गांवों की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है।
"बुनियादी ढांचे की उपेक्षा न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों के जीवन के साथ एक जानलेवा खिलवाड़ है।"
स्कूल के शिक्षकों ने इस मामले में अपनी बेबसी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें भेजीं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण कोई कदम नहीं उठाया गया। बच्चों के सड़क पर उतरने के बाद अब जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) पूरन सिंह ने 'सुरक्षा समिति' की आपात बैठक बुलाई है और खस्ताहाल संस्थानों को नोटिस जारी करने की बात कही है।
यह आक्रोश केवल अलीगढ़ तक सीमित नहीं है। हाल के समय में फतेहपुर, हमीरपुर, कन्नौज और लखनऊ जैसे शहरों में भी सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर छात्रों में असंतोष देखा गया है। यह दर्शाता है कि अब नई पीढ़ी (Gen-Alpha) अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है और व्यवस्था की खामियों को चुनौती दे रही है।
Frequently Asked Questions
1. अलीगढ़ के इस स्कूल में मुख्य समस्या क्या है?
स्कूल की छत की बीम टूटी हुई है, दीवारें जर्जर हैं और परिसर में जहरीले सांपों का खतरा है।
2. प्रशासन ने इस प्रदर्शन के बाद क्या कदम उठाए हैं?
DIOS ने सुरक्षा समिति की आपात बैठक बुलाई है और असुरक्षित स्कूलों को नोटिस भेजने का निर्णय लिया है।