सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की बात कही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नीति लागू करते समय बच्चों पर मानसिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

  • सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को तीन-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करने को कहा।
  • नई नीति के तहत कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं पढ़ना अनिवार्य है।
  • अदालत ने भाषा शिक्षकों और बुनियादी ढांचे की कमी पर चिंता जताई।
  • मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को तय की गई है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ती चिंता पर संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बोर्ड से अनुरोध किया है कि वह इस शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 6 के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान या छूट पर विचार करे।

यह कानूनी विवाद सीबीएसई द्वारा जारी उस सर्कुलर से शुरू हुआ, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप है। इस नीति के अनुसार, कक्षा 9 तक पहुँचने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। विवाद तब गहरा गया जब इस नीति का प्रभाव कक्षा 6 जैसे छोटे स्तर के छात्रों पर भी पड़ने लगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला नीति निर्माण और उसके जमीनी कार्यान्वयन के बीच के बड़े अंतर को उजागर करता है। हालांकि स्वदेशी भाषाओं को बढ़ावा देना सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सही है, लेकिन बिना पर्याप्त शिक्षक प्रशिक्षण के इसे थोपना छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका सख्त समयसीमा के बजाय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यावहारिक संभावनाओं को प्राथमिकता देगी।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने जोर देकर कहा कि बच्चों को किसी भी तरह के दबाव में नहीं लाया जाना चाहिए। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि बोर्ड विभिन्न स्कूलों में उपलब्ध भाषा विकल्पों के लिए आवश्यक मानव संसाधन बुनियादी ढांचे का निर्माण कैसे करेगा।

"बहुभाषी ढांचे की ओर संक्रमण तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि भाषाई विशेषज्ञों और आधुनिक शिक्षण उपकरणों में निवेश न किया जाए।"

केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। हालांकि, उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने के सुझाव पर विचार करेंगे और कोर्ट को सूचित करेंगे।

मामले को और जटिल बनाते हुए, याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि सीबीएसई के पास कक्षा 6 से 8 तक का पाठ्यक्रम तैयार करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि यह जिम्मेदारी पूरी तरह से NCERT की है। यह चुनौती सीबीएसई के वर्तमान आदेश की कानूनी वैधता पर सवाल उठाती है।

विशेषता पिछला दृष्टिकोण नई NEP/CBSE नीति
भाषा आवश्यकता लचीला/परिवर्तनीय 3 भाषाएं अनिवार्य
भारतीय भाषा फोकस वैकल्पिक/सीमित कम से कम 2 भारतीय भाषाएं
विदेशी भाषा की स्थिति अक्सर प्राथमिक विकल्प केवल तीसरी या चौथी भाषा
क्या आप जानते हैं?: तीन-भाषा सूत्र (Three-Language Formula) की सिफारिश सबसे पहले 1968 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय एकीकरण और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या तीन-भाषा नीति सभी सीबीएसई छात्रों के लिए अनिवार्य है?
हाँ, हालिया सर्कुलर के अनुसार यह कक्षा 9 तक अनिवार्य है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में छोटे बैचों के लिए इसके कार्यान्वयन की समीक्षा कर रहा है।

प्रश्न 2: क्या छात्र अभी भी विदेशी भाषा चुन सकते हैं?
हाँ, लेकिन केवल तीसरी भाषा के रूप में (दो भारतीय भाषाओं के बाद) या एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में।