द हिंदू फ्यूचर इंडिया क्लब और SRM यूनिवर्सिटी-AP द्वारा आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते जॉब मार्केट में टिके रहने के लिए AI टूल्स और विश्लेषणात्मक कौशल अनिवार्य हैं।

  • छात्रों को करियर बनाने के लिए मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी के नए अवसरों को खोजना चाहिए।
  • प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए AI टूल्स और एनालिटिकल क्षमता का विकास आवश्यक है।
  • करियर की सफलता परिस्थितियों के बजाय आकांक्षाओं और निरंतर सीखने पर निर्भर करती है।

तेजी से बदलते तकनीकी युग में, केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। गुंटूर के पास RVR&JC इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में द हिंदू फ्यूचर इंडिया क्लब (FIC) और SRM यूनिवर्सिटी-AP द्वारा आयोजित एक करियर सेमिनार में विशेषज्ञों ने छात्रों को चेतावनी दी कि 'कम्फर्ट ज़ोन' में रहना उनके करियर के लिए सबसे बड़ा खतरा हो सकता है।

SRM यूनिवर्सिटी-AP के पारी स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रो. सत्य दुव्वुरी ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति का भाग्य उसकी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसकी पसंद, सीखने की क्षमता और उसकी आकांक्षाओं से तय होता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि शैक्षणिक डिग्री और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नियमित कार्यों को स्वचालित कर रहा है, डिग्री का मूल्य 'ज्ञान संचय' से हटकर 'समस्या समाधान की चपलता' (Problem-solving agility) की ओर बढ़ रहा है।

सेमिनार के दौरान छोटे शहरों के छात्रों की चिंताओं, जैसे बेरोजगारी, AI का प्रभाव और संचार कौशल (Communication skills) की कमी पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रो. दुव्वुरी ने छात्रों को सलाह दी कि वे AI को एक खतरे के रूप में नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं को बढ़ाने वाले एक उपकरण के रूप में देखें।

"आपका भाग्य आपके हाथों में है; सीमाओं से परे जाएं और केवल धन के पीछे भागने के बजाय उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करें।"

ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए, उन्होंने बताया कि कैसे कई वैश्विक नेताओं ने अपने करियर की शुरुआत इंजीनियरिंग या विज्ञान से की और बाद में अपनी तकनीकी नींव का उपयोग करके प्रभावशाली नेतृत्व पदों तक पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी ज्ञान एक लॉन्चपैड की तरह काम करता है, लेकिन सफलता के लिए अनुकूलन क्षमता (Adaptability) जरूरी है।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रिंसिपल कोल्ला श्रीनिवास के संबोधन से हुई और समापन SRM-AP के सहायक निदेशक वी.वी.एस. प्रदीप के शब्दों के साथ हुआ। छात्रों को सलाह दी गई कि वे अपनी रुचियों का सक्रिय रूप से पीछा करें और निरंतर विकास की मानसिकता अपनाएं।

क्या आप जानते हैं?: वैश्विक श्रम रुझानों के अनुसार, 'अनुकूलन क्षमता' (Adaptability) अब फॉर्च्यून 500 रिक्रूटर्स द्वारा मांगी जाने वाली शीर्ष तीन सॉफ्ट स्किल्स में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: छात्र जॉब मार्केट में AI के सामने खुद को प्रतिस्पर्धी कैसे बना सकते हैं?
उच्च-स्तरीय विश्लेषणात्मक कौशल विकसित करके और AI टूल्स को अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपयोग करके।

प्रश्न 2: क्या नेतृत्व भूमिका के लिए केवल तकनीकी डिग्री पर्याप्त है?
नहीं, तकनीकी डिग्री एक आधार प्रदान करती है, लेकिन नेतृत्व के लिए मैनेजमेंट कौशल, प्रभावी संचार और कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने का साहस आवश्यक है।