तमिलनाडु के वेल्लोर में सरकारी पंचायत यूनियन मिडिल स्कूल की इमारतें गिराए जाने के बाद 134 छात्र खुले आसमान के नीचे शिक्षा पाने को मजबूर हैं। प्रशासन के नए निर्माण के वादे के बावजूद, बच्चे मानसून की आहट के बीच पेड़ों की छांव में कक्षाएं ले रहे हैं।

  • वेल्लोर के कोट्टयुर गांव में सरकारी स्कूल की दो पुरानी इमारतें 2024 में गिराई गईं।
  • 134 छात्र, जिनमें 67 लड़कियां शामिल हैं, वर्तमान में पेड़ों के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं।
  • लड़कों के लिए शौचालय की सुविधा पूरी तरह अनुपलब्ध है।
  • पूर्वोत्तर मानसून के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के कोट्टयुर गांव में शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकारी पंचायत यूनियन मिडिल स्कूल के छात्र पिछले कई महीनों से बिना किसी छत के, पेड़ों की छांव में अपनी कक्षाएं ले रहे हैं। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब 2024 के मध्य में स्कूल की दो जर्जर इमारतों को सुरक्षा कारणों से गिरा दिया गया था। प्रशासन ने वादा किया था कि पुरानी इमारतों के स्थान पर जल्द ही आधुनिक कक्षाएं बनाई जाएंगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

यह स्कूल 1954 में स्थापित किया गया था और लगभग 8,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है। स्कूल के प्रधानाध्यापक जी. श्रीधर ने बताया कि छतों से प्लास्टर गिरने के कारण इमारतों को गिराना आवश्यक था, लेकिन उसके बाद नए निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सबसे गंभीर समस्या स्वच्छता की है; जहां लड़कियों के लिए कुछ शौचालय उपलब्ध हैं, वहीं लड़कों के लिए कोई सुविधा नहीं है क्योंकि पुराना ढांचा ध्वस्त हो चुका है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not just a local infrastructure failure but a systemic collapse of the 'Safety-First' approach. While the government demolished buildings to prevent accidents—following the tragic 2021 Tirunelveli incident—they failed to provide an immediate alternative, effectively trading a structural risk for an environmental and health risk. This creates a paradox where the act of ensuring safety has led to a state of vulnerability.

शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित वातावरण का अधिकार है; बुनियादी ढांचे के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक सपना मात्र है।

स्थानीय निवासियों और अभिभावकों, जैसे कि आर. बकीयम, ने चिंता जताई है कि पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के साथ स्थिति और बदतर हो जाएगी। खुले में बैठने के कारण बच्चे मच्छरों और कीड़ों के शिकार हो रहे हैं, जिससे विशेष रूप से छोटे बच्चों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। स्कूल की चारदीवारी भी ध्वस्त हो चुकी है, जिससे परिसर की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त हो गई है।

शिक्षा विभाग के अनुसार, वेल्लोर, तिरुवन्नामलई, रानीपेट और तिरुपत्तुर जिलों में कुल 812 ऐसी इमारतों की पहचान की गई थी जिन्हें गिराया जाना था। यह अभियान 17 दिसंबर, 2021 को तिरुनेलवेली में एक स्कूल शौचालय की दीवार गिरने से तीन छात्रों की मौत के बाद शुरू किया गया था। हालांकि, योजना का कार्यान्वयन धरातल पर विफल साबित हो रहा है।

क्या आप जानते हैं?: भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में 'ओपन एयर क्लासरूम' का प्रयोग एक शिक्षण पद्धति के रूप में किया जाता है, लेकिन वेल्लोर के मामले में यह विकल्प नहीं बल्कि मजबूरी है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: छात्रों को पेड़ों के नीचे क्यों पढ़ना पड़ रहा है?
उत्तर: क्योंकि स्कूल की जर्जर इमारतों को 2024 में गिरा दिया गया था और प्रशासन ने अभी तक नई इमारतों का निर्माण नहीं किया है।

प्रश्न 2: इस समस्या का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के वादों का पूरा न होना।