डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल के चौथे दीक्षांत समारोह में गूगल क्लाउड इंडिया के एमडी शशिकुमार श्रीधरन ने उत्पादों के 'अनुभवों' में बदलने और सामाजिक रूप से जागरूक नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • गूगल क्लाउड इंडिया एमडी ने केवल व्यावसायिक अवसरों के बजाय मानव-केंद्रित नवाचार की वकालत की।
  • डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल (DUK) ने अपना चौथा दीक्षांत समारोह मनाया, जिसमें मास्टर और पीएचडी विद्वियों को डिग्री प्रदान की गई।
  • राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर ने औपनिवेशिक शिक्षा से नेतृत्व-आधारित शिक्षा की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

तिरुवनंतपुरम में डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल (DUK) के चौथे दीक्षांत समारोह में एक प्रभावशाली संबोधन देते हुए, गूगल क्लाउड (इंडिया) के प्रबंध निदेशक शशिकुमार श्रीधरन ने अगली पीढ़ी के तकनीकी दिग्गजों को सफलता को फिर से परिभाषित करने की चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि आधुनिक नवाचारकर्ता को किसी समस्या की तत्काल वित्तीय क्षमता से परे देखना चाहिए और इसके बजाय उन संभावनाओं को पहचानना चाहिए जो यह लोगों और समाज के लिए पैदा करती हैं।

श्रीधरन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि एक स्मार्ट और तेजी से डिजिटल होती दुनिया में, उत्पादों और सेवाओं की पारंपरिक परिभाषाएं अब पुरानी हो चुकी हैं। उन्होंने समझाया कि ये तेजी से "अनुभवों" (Experiences) में विकसित हो रहे हैं, जहाँ मूल्य उपकरण में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वह मानवीय स्थिति को कैसे बेहतर बनाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जीवन के हर पहलू में प्रवेश कर रहे हैं, उद्योग एक "उद्देश्य संकट" का सामना कर रहा है। स्नातकों को मानवीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करके, श्रीधरन नैतिक तकनीक (Ethical Tech) की ओर संकेत कर रहे हैं। यह दृष्टिकोण बताता है कि दीर्घकालिक कॉर्पोरेट स्थिरता अब अल्पकालिक लाभ के बजाय सामाजिक प्रभाव से जुड़ी है।

उत्पाद-आधारित अर्थव्यवस्था से अनुभव-आधारित अर्थव्यवस्था में संक्रमण के लिए सहानुभूति और डिजाइन सोच में मौलिक बदलाव की आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में कार्यरत राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर ने शिरकत की। ऐतिहासिक शिक्षा पद्धति की तीखी आलोचना करते हुए, राज्यपाल ने कहा कि औपनिवेशिक शिक्षा मुख्य रूप से ऐसे लोगों को तैयार करने के लिए डिज़ाइन की गई थी जो मौजूदा व्यवस्था की सेवा कर सकें। उन्होंने नए स्नातकों से ऐसी शिक्षा के मॉडल को अपनाने का आग्रह किया जो उन्हें परिवर्तन का नेतृत्व करने में सक्षम बनाए।

राज्यपाल अरलेकर ने स्नातकों को केवल रोजगार की खोज से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की व्यापक भावना विकसित करने का आह्वान किया, यह सुझाव देते हुए कि डिग्री की असली माप यह है कि इसका उपयोग देश की प्रगति के लिए कैसे किया जाता है।

यह समारोह डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, क्योंकि इसमें 2024-26 शैक्षणिक वर्ष के मास्टर छात्रों और विश्वविद्यालय के पहले पीएचडी शोधकर्ताओं के बैच को डिग्री प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में कुलपति सजी गोपीनाथ और रजिस्ट्रार ए. मुजीब सहित प्रमुख शैक्षणिक नेता शामिल हुए।

क्या आप जानते हैं?: डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल भारत में एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया एक अग्रणी संस्थान है, जो शैक्षणिक अनुसंधान को उद्योग-आधारित नवाचार के साथ जोड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: शशिकुमार श्रीधरन के भाषण का मुख्य संदेश क्या था?
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्नातकों को साधारण व्यावसायिक अवसरों के बजाय मानवीय और सामाजिक क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह पहचानना चाहिए कि डिजिटल सेवाएँ अब "अनुभव" बन गई हैं।

प्रश्न 2: राज्यपाल अरलेकर ने औपनिवेशिक शिक्षा के बारे में क्या कहा?
उन्होंने तर्क दिया कि औपनिवेशिक शिक्षा का उद्देश्य व्यवस्था के लिए सेवक पैदा करना था, जबकि आधुनिक शिक्षा को ऐसे नेता पैदा करने चाहिए जो प्रणालीगत बदलाव ला सकें।