पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने 90,000 सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है जिसमें RTE अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किया गया है।
- पश्चिम बंगाल के लगभग 90,000 प्राथमिक और उच्च-प्राथमिक शिक्षकों को अब TET पास करना होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता प्राप्त करने के लिए 31 अगस्त, 2028 की अंतिम समय सीमा तय की है।
- जिन शिक्षकों की सेवा के 5 वर्ष या उससे कम बचे हैं, उन्हें सेवा जारी रखने के लिए छूट है, लेकिन पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य होगा।
पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य की परीक्षा अधिकारियों को उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्देश के बाद आया है, जिसमें योग्य सेवारत शिक्षकों के लिए TET योग्यता को अनिवार्य बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में यह व्यवस्था दी थी कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति RTE अधिनियम से पहले हुई थी और जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक बची है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए TET उत्तीर्ण करना होगा। मई 2026 के अपने आदेश में, अदालत ने समय सीमा को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया और 31 अगस्त, 2028 को अंतिम तिथि निर्धारित की। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि राज्य साल में दो बार TET आयोजित करें ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह आदेश प्रशासनिक अनुपालन और शिक्षकों के अधिकारों के बीच एक बड़ा टकराव पैदा करता है। दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक पात्रता परीक्षा थोपना प्रणालीगत मानकीकरण की कोशिश तो है, लेकिन यह शिक्षकों के मनोबल को गिरा सकता है। यदि बड़ी संख्या में शिक्षक इस परीक्षा में विफल रहते हैं, तो यह राज्य की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
अनुभवी शिक्षकों पर पिछली तारीख से पात्रता मानदंड थोपना गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में एक साहसिक कदम है, लेकिन यह कार्यबल के एक महत्वपूर्ण हिस्से को हतोत्साहित कर सकता है।
इस निर्णय का राज्य के शिक्षक समुदाय में कड़ा विरोध हो रहा है। बंगिया शिक्षक ओ शिक्षा कर्मी समिति ने अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए छूट की मांग की है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों ने 15 से 20 साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें इस स्तर पर नई परीक्षा देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह का विरोध तमिलनाडु में भी देखा गया, जहाँ विधानसभा ने 3.28 लाख शिक्षकों के लिए स्थायी छूट की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था।
पश्चिम बंगाल में अब पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) और पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे। हालांकि अभी परीक्षा की तारीखों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विभाग ने डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया है।
| श्रेणी | TET आवश्यकता | समय सीमा/शर्त |
|---|---|---|
| 5 वर्ष से अधिक सेवा शेष | अनिवार्य | 31 अगस्त, 2028 |
| 5 वर्ष या उससे कम सेवा शेष | सेवा के लिए छूट | पदोन्नति के लिए अनिवार्य |
| RTE अधिनियम 2009 के बाद नियुक्त | पहले से अनिवार्य | नियुक्ति के समय |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यदि कोई शिक्षक अगस्त 2028 तक TET पास नहीं कर पाता है तो क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की 5 वर्ष से अधिक सेवा शेष है, उनके लिए सेवा में बने रहने हेतु TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
प्रश्न 2: क्या पश्चिम बंगाल के सभी शिक्षकों को यह परीक्षा देनी होगी?
नहीं, केवल वे शिक्षक जो RTE अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक बची है, उन्हें ही यह परीक्षा देनी होगी।