आंध्र प्रदेश प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (APPTA) ने मिड-डे मील योजना के तहत छात्रों को दिए जाने वाले चावल की मात्रा बढ़ाने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता और आकर्षक मेनू के कारण छात्र नियमित रूप से भोजन कर रहे हैं, जिससे मौजूदा राशन कम पड़ रहा है।

  • APPTA ने सरकार से मिड-डे मील में चावल की मात्रा बढ़ाने की मांग की है।
  • वर्तमान में प्राइमरी स्कूलों में 100 ग्राम और हाई स्कूलों में 150 ग्राम चावल दिया जाता है।
  • भोजन की उच्च गुणवत्ता के कारण छात्रों की खपत बढ़ गई है।

आंध्र प्रदेश में मिड-डे मील योजना के तहत छात्रों को मिलने वाले भोजन की मात्रा को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग उठी है। आंध्र प्रदेश प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (APPTA) के नेताओं ने संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि प्रत्येक छात्र के लिए आवंटित चावल की मात्रा में तत्काल वृद्धि की जाए।

एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष के. प्रकाश राव और महासचिव एम.जी. मेहदी ने समग्र शिक्षा राज्य परियोजना निदेशक बी. श्रीनिवास राव को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि वर्तमान में आवंटित चावल की मात्रा छात्रों की वास्तविक आवश्यकता को पूरा करने में अपर्याप्त है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मांग?

APPTA के अनुसार, योजना के तहत आपूर्ति किए जा रहे चावल की गुणवत्ता और एक आकर्षक मेनू के कारण छात्र अब बहुत नियमित रूप से स्कूल में भोजन कर रहे हैं। पहले के मुकाबले छात्रों की भागीदारी और भोजन के प्रति उत्साह बढ़ने से राशन का स्टॉक तेजी से समाप्त हो रहा है।

भोजन की गुणवत्ता में सुधार ने छात्रों की भूख और नियमितता को बढ़ाया है, जिससे मौजूदा कोटा अब अपर्याप्त साबित हो रहा है।

वर्तमान में, प्राथमिक विद्यालयों में प्रत्येक छात्र के लिए 100 ग्राम चावल और हाई स्कूलों में 150 ग्राम चावल का आवंटन किया जाता है। शिक्षकों का मानना है कि यदि इस मात्रा को नहीं बढ़ाया गया, तो छात्रों को मिलने वाले पोषण स्तर पर असर पड़ सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में मिड-डे मील योजना (अब पीएम पोषण) का उद्देश्य स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना है। आंध्र प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन काफी प्रभावी रहा है, लेकिन बढ़ती मांग और बेहतर प्रबंधन के कारण संसाधनों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

Did You Know?: मिड-डे मील योजना दुनिया के सबसे बड़े स्कूल पोषण कार्यक्रमों में से एक है, जो करोड़ों बच्चों तक पहुँचती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: वर्तमान में प्राइमरी स्कूलों में कितना चावल दिया जाता है?
उत्तर: वर्तमान में प्राथमिक विद्यालयों में प्रति छात्र 100 ग्राम चावल आवंटित किया जाता है।

प्रश्न 2: APPTA ने वृद्धि की मांग क्यों की है?
उत्तर: भोजन की बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक मेनू के कारण छात्र नियमित रूप से भोजन कर रहे हैं, जिससे मौजूदा मात्रा कम पड़ रही है।