पंजाब में नए SNA-SPARSH पोर्टल के लागू होने से मिड-डे मील के लिए फंड मिलने में देरी हो रही है। शिक्षकों को अब हर सामग्री का जीएसटी बिल अपलोड करना अनिवार्य है, जिससे ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ गई हैं।
- नया SNA-SPARSH पोर्टल लागू होने से मिड-डे मील का फंड 4-5 महीनों से रुका हुआ है।
- शिक्षकों को अब सब्जियों और फलों के लिए भी पक्के बिल (GST युक्त) अपलोड करने होंगे।
- स्थानीय विक्रेताओं द्वारा बिल न देने के कारण शिक्षक अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।
- केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्तपोषित पीएम-पोषण योजना प्रभावित है।
पंजाब के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना को लागू करना अब शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए नए SNA-SPARSH (समेकित प्रणाली एकीकृत शीघ्र हस्तांतरण) पोर्टल के कार्यान्वयन के कारण, राज्य के शिक्षकों को पिछले चार से पांच महीनों से खाना पकाने की लागत (cooking costs) प्राप्त नहीं हुई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई शिक्षक छात्रों के भोजन के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च कर रहे हैं।
समस्या की मुख्य जड़ नए पोर्टल की सख्त शर्तें हैं। अब शिक्षकों को मिड-डे मील के लिए उपयोग की जाने वाली प्रत्येक सामग्री, जिसमें सब्जियां और फल भी शामिल हैं, का बिल पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है। हालांकि किराने के सामान के लिए बिल प्राप्त करना आसान है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जियां और फल आमतौर पर सड़क किनारे के रेहड़ी-पटरी वालों या छोटे विक्रेताओं से खरीदे जाते हैं, जो कोई औपचारिक बिल या जीएसटी रसीद जारी नहीं करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह प्रक्रिया जमीनी स्तर पर प्रशासनिक बाधाओं का सामना कर रही है। जब तक बिलिंग प्रक्रिया को स्थानीय अर्थव्यवस्था के अनुकूल नहीं बनाया जाता, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने में व्यवधान बना रहेगा।
डिजिटल पारदर्शिता और ग्रामीण वास्तविकता के बीच का यह अंतर सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में एक बड़ी बाधा बन सकता है।
पीएम-पोषण योजना के तहत, प्राथमिक छात्रों के लिए प्रति बच्चा 6.78 रुपये और उच्च प्राथमिक छात्रों के लिए 10.17 रुपये प्रतिदिन का खर्च निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, फल देने के लिए प्रति बच्चा 5 रुपये प्रति सप्ताह का बजट है। मुक्तासर जिले के एक शिक्षक, पवन कुमार ने बताया कि केले की कीमत ही 7 से 8 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे बजट का पालन करना असंभव हो गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पहले, मिड-डे मील के लिए फंड स्कूलों को अग्रिम रूप से जारी किया जाता था, और ऑडिट के दौरान बिलों की जांच की जाती थी। अब, केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत, फंड का प्रवाह सीधे राज्य से हटाकर SNA-SPARSH पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया अधिक जटिल हो गई है।
| विवरण | पुरानी व्यवस्था (PFMS) | नई व्यवस्था (SNA-SPARSH) |
|---|---|---|
| फंड का वितरण | अग्रिम भुगतान (Advance) | बिल अपलोड करने के बाद प्रतिपूर्ति (Reimbursement) |
| बिलिंग की आवश्यकता | ऑडिट के दौरान जांच | पोर्टल पर तत्काल अपलोड अनिवार्य |
| मुख्य चुनौती | प्रशासनिक देरी | स्थानीय विक्रेताओं से बिल प्राप्त करना |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: शिक्षकों को अपनी जेब से पैसा क्यों खर्च करना पड़ रहा है?
उत्तर: क्योंकि नए पोर्टल पर बिल अपलोड न होने के कारण पिछले 5 महीनों से मिड-डे मील का फंड जारी नहीं हुआ है।
प्रश्न 2: SNA-SPARSH पोर्टल क्या है?
उत्तर: यह केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल फंड-फ्लो और कैश-मैनेजमेंट सिस्टम है जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के फंड को ट्रैक करना है।