केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग (KSERC) ने ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) के संचालन और टैरिफ के लिए नए मसौदा नियम जारी किए हैं। यह कदम राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता का बेहतर उपयोग करने और बिजली की मांग को संतुलित करने के लिए उठाया गया है।

  • KSERC ने ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) के लिए पहली बार बहु-वर्षीय टैरिफ (MYT) नियमों में प्रावधान शामिल किए हैं।
  • बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) दोनों को इन नियमों के दायरे में लाया गया है।
  • 'ऊर्जा भंडारण प्रणाली डेवलपर्स' (ESSD) को बिजली क्षेत्र में एक नए विनियमित वर्ग के रूप में मान्यता दी गई है।
  • केरल में अक्टूबर तक पांच बड़े बैटरी भंडारण प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की उम्मीद है।

केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग (KSERC) ने राज्य के बिजली क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) के संचालन और प्रबंधन के लिए नए मसौदा बहु-वर्षीय टैरिफ (MYT) नियम पेश किए हैं। यह पहली बार है जब राज्य के टैरिफ नियमों में ऊर्जा भंडारण के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ये नए नियम 2027-28 से शुरू होने वाली पांच साल की नियंत्रण अवधि के लिए तैयार किए गए हैं। मसौदे में सामुदायिक और सामूहिक ऊर्जा भंडारण सेवाओं, पीक-ऑवर (अधिकतम मांग के समय) सहायता के लिए टैरिफ और परिचालन मापदंडों को विस्तार से समझाया गया है। इसके अलावा, जो कंपनियां ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को समय से पहले चालू करेंगी, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

ऊर्जा भंडारण का महत्व

केरल के बिजली क्षेत्र में ऊर्जा भंडारण की कमी के कारण राज्य अब तक अपनी बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता का पूरा लाभ उठाने में असमर्थ रहा है। सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन में अधिक होता है, लेकिन मांग शाम के समय चरम पर होती है। ऊर्जा भंडारण प्रणालियां इस अंतर को पाटकर ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करती हैं।

ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का एकीकरण केरल के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि इस नियामक ढांचे के आने से निजी निवेश में वृद्धि होगी, क्योंकि अब 'ऊर्जा भंडारण प्रणाली डेवलपर्स' (ESSD) को आधिकारिक तौर पर एक विनियमित इकाई के रूप में पहचान मिल गई है। इससे बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) के विकास को नई गति मिलेगी।

केरल में आगामी प्रोजेक्ट्स

केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) ने पहले ही घोषणा की है कि वह इस साल अक्टूबर तक पांच महत्वपूर्ण बैटरी ऊर्जा भंडारण (BESS) परियोजनाओं को पूरा करने की योजना बना रहा है। इन परियोजनाओं का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

स्थानक्षमता (MW/MWh)प्रकार
मैलट्टी, कासरगोड125 MW / 500 MWhBESS
मुल्लेरिया, कासरगोड15 MW / 60 MWhBESS
श्रीकांतपुरम40 MW / 160 MWhBESS
अरियाकोड30 MW / 120 MWhBESS
पोथेनकोड40 MW / 160 MWhBESS

राज्य सरकार ने अपने संशोधित बजट 2026-27 में भी सभी पंचायतों में सामुदायिक-आधारित बैटरी भंडारण परियोजनाओं को तैनात करने का वादा किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, बिजली ग्रिड केवल उत्पादन और तत्काल खपत पर आधारित रहे हैं। हालांकि, जैसे-जैसे सौर और पवन ऊर्जा जैसे अस्थिर स्रोतों का हिस्सा बढ़ रहा है, ग्रिड को स्थिर रखने के लिए 'बफर' के रूप में ऊर्जा भंडारण अनिवार्य हो गया है। केरल अब इस दिशा में अग्रणी राज्यों में शामिल होने की राह पर है।

Frequently Asked Questions

1. ESSD क्या है?
ESSD का अर्थ है ऊर्जा भंडारण प्रणाली डेवलपर, जो बिजली को स्टोर करने और लाभार्थियों को आपूर्ति करने के लिए ऊर्जा भंडारण सुविधा का स्वामित्व या संचालन करता है।

2. ये नियम कब से प्रभावी होंगे?
ये नियम 2027-28 से शुरू होने वाली पांच साल की टैरिफ अवधि के लिए प्रस्तावित हैं।

Did You Know?: पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) पानी का उपयोग करके ऊर्जा को स्टोर करते हैं, जो बैटरी की तुलना में बहुत बड़े पैमाने पर भंडारण कर सकते हैं।