X‑Men ‘97 के दूसरे सीज़न का चौथा एपिसोड ‘राइज़ ऑफ़ अपोकैलिप्स पार्ट II’ मार्वेल के सबसे प्रखर प्रतिपक्षी को कॉमिक्स के समान गहराई से पेश करता है। प्रोफेसर जेनर और मैग्नेटो की अनजानी भागीदारी कहानी को नई दिशा देती है, जबकि सेलेस्टियल्स और टाइम‑ट्रैवल का प्रयोग दर्शकों को आश्चर्यचकित कर देता है।
मार्वेल के प्रतिष्ठित प्रतिपक्षी अपोकैलिप्स को अब तक की सबसे सच्ची रूपांतरण X‑Men ‘97 ने दी है। सीज़न 2 के चौथे एपिसोड में, कहानी दो‑भागीय ‘राइज़ ऑफ़ अपोकैलिप्स’ की दूसरी कड़ी में न केवल एन् सबाह नूर (एडेटोकुंबोह M'कॉर्मैक) को अपोकैलिप्स के रूप में स्थापित किया गया, बल्कि प्रोफेसर जीनर (रॉस मारक्वैंड) और मैग्नेटो (मैथ्यू वाटर्सन) की भूमिका को भी उजागर किया गया, जिससे उनके कार्यों का प्रत्यक्ष प्रभाव अपोकैलिप्स की उत्पत्ति पर पड़ता है।
पृष्ठभूमि और कॉमिक इतिहास
अपोकैलिप्स की जड़ें 1986 में X‑Factor #5 में छाया में दिखी थी, और अगले अंक में वह एक ऊँचा, शैप‑शिफ्टिंग म्यूटेंट के रूप में सामने आया, जिसकी शक्ति सेलीस्टियल्स द्वारा छोड़ी गई प्राचीन तकनीक से जुड़ी थी। शुरुआती दिनों में वह ‘एलायन्स ऑफ़ इविल’ नामक समूह का प्रमुख था, जो X‑Factor टीम – साइक्लॉप्स, जीन ग्रे, बीस्ट, आईसमैन और एंजेल – को चुनौती देता था। उनकी प्रमुख विचारधारा “सर्वोत्तम जीव ही बचेगा” थी, जो मानवता और म्यूटेंट दोनों को कठोर चयन के माध्यम से उन्नत करने की कोशिश करती थी।
एनीमेशन और सिनेमा में अपोकैलिप्स
1990 के दशक में ‘एज ऑफ़ अपोकैलिप्स’ जैसी क्रॉसओवर इवेंट्स ने इस किरदार को लोकप्रियता दिलायी, परंतु 2016 की फिल्म X‑Men: Apocalypse में ओस्कर इसाक द्वारा निभाए गए अपोकैलिप्स को गहराई की कमी के कारण आलोचना मिली। एनीमेटेड सीरीज़ ‘X‑Men: The Animated Series’ ने उसे उचित स्क्रीन टाइम दिया, परन्तु पात्र की जटिल पृष्ठभूमि को पूरी तरह नहीं दिखा सका।
‘X‑Men ‘97’ ने कैसे बदला खेल
सीज़न 2 की कथा म्यूटेंट्स को दो अलग‑अलग समय-रेखाओं में विभाजित करती है: एक समूह 40वीं सदी में पहुँचता है जहाँ अपोकैलिप्स का शासन है, और दूसरा प्राचीन मिस्र में जहाँ एन् सबाह नूर अभी भी मानव रूप में है। मैग्नेटो, इस अवसर को देख कर, नूर को जीनर के सहयोगी सिद्धांत सिखाने का प्रयास करता है, जिससे नूर को भविष्य में अपोकैलिप्स बनने की राह से बचाया जा सके। लेकिन नूर अंततः भविष्य की टीमों के साथ मिलकर सेलीस्टियल टेम्पल की खोज करता है, जहाँ वह अपना नियती स्वीकार करता है।
यह बिंदु कहानी को केवल ‘टाइम‑ट्रैवल’ से आगे ले जाता है; यह दिखाता है कि जीनर और मैग्नेटो की “सहयोग” भी अनजाने में अपोकैलिप्स की उत्पत्ति में योगदान देती है। इस प्रकार, अपोकैलिप्स का उदय अब केवल एक बाहरी खतरे नहीं, बल्कि X‑Men की अपनी विचारधारा के भीतर ही निहित है। यह दृष्टिकोण ‘राइज़ ऑफ़ अपोकैलिप्स: पार्ट II’ को पिछले सीज़न के ‘रिमेम्बर इट’ जैसा ही भावनात्मक प्रभाव देता है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि इस दिशा को जारी रखा गया, तो आगे के एपिसोड्स में अपोकैलिप्स के साथ म्यूटेंट‑ह्यूमन सहयोग की नैतिक दुविधा और भी गहरी हो सकती है। दर्शक इस बात की प्रतीक्षा में रहेंगे कि जीनर की ‘इंटरवेंशनिस्ट’ प्रकृति और मैग्नेटो की ‘रिवोल्यूशनरी’ सोच किस बिंदु पर टकराएँगी, और क्या अपोकैलिप्स को अंततः पुनः मानवीकरण या नाश के रास्ते पर ले जाया जाएगा।
समग्र रूप से, X‑Men ‘97 ने कॉमिक्स के मूल तत्वों को आधुनिक एनीमेशन तकनीक और जटिल कहानी‑बुनाई के साथ मिलाकर अपोकैलिप्स को वह सम्मान दिया है, जो पिछले सभी अनुकूलनों से कहीं अधिक सच्चा और प्रभावशाली है।