दक्षिण भारत की नाइटिंगेल के रूप में मशहूर प्लेबैक गायिका एस जणाकी का 88 साल की उम्र में मैसूर के अपोलो हॉस्पिटल में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषा में अपने आवाज़ से भारतीय संगीत को समृद्ध किया और कई राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त किए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एस जणाकी का 88 वर्ष की आयु में मैसूर में निधन।
- 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 10,000 से अधिक गीत गाए।
- चार नेशनल फ़िल्म अवार्ड और 33 राज्य फ़िल्म अवार्ड सहित कई सम्मान प्राप्त।
वर्ल्ड फ़ेमस प्लेबैक गायिका एस जणाकी ने 11 जुलाई 2026 को मैसूर के अपोलो हॉस्पिटल में उम्र‑संबंधी रोगों के कारण अंतिम सांस ली। यह खबर भारतीय संगीत जगत को शोक में डुबो गई, क्योंकि जणाकी माँ के रूप में जानी जाने वाली आवाज़ ने तीन दशकों से अधिक समय तक साउथ इंडियन फिल्म संगीत को परिभाषित किया।
संगीत यात्रा और बहुभाषी योगदान
1957 में अपने करियर की शुरुआत करने के बाद, जणाकी ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, हिन्दी और कई अन्य भाषाओं में अपने अद्वितीय स्वर से लाखों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने इलायाराजा और एस.पी. बालासुब्रामण्यम के साथ मिलकर कई क्लासिक धुनें तैयार कीं, जिससे दक्षिण भारतीय संगीत का वैश्विक स्तर पर मान्यताप्राप्त स्वरुप बना।
पुरस्कार, मान्यताएँ और पद्म भूषण से इनकार
जणाकी के संगीत योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली, जहाँ उन्होंने चार नेशनल फ़िल्म अवार्ड और अभूतपूर्व 33 राज्य फ़िल्म अवार्ड जीते। 2013 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित करने का प्रस्ताव आया, पर उन्होंने इसे देर से मिलने वाला सम्मान मानते हुए ठुकरा दिया और कहा कि उन्हें भारत रत्न का सम्मान अधिक योग्य है। इसके अलावा उन्हें कर्नाटक राज्य का राज्योत्सव पुरस्कार और मैसूर विश्वविद्यालय से सम्मानित डॉक्टरेट भी मिला।
व्यक्तिगत जीवन और विरासत
1959 में उन्होंने वी रामाप्रसाद से विवाह किया, और पति के निधन के बाद उन्होंने हैदराबाद को अपना घर बनाया, जहाँ उन्होंने अपने अंतिम वर्ष बिताए। जणाकी के निधन के बाद कई संगीतकार, अभिनेता और राजनेता ने शोक व्यक्त किया, यह कहते हुए कि उनकी आवाज़ भारतीय फिल्म संगीत की आत्मा थी। उनके गीत आज भी युवा कलाकारों के लिए अध्ययन का विषय हैं और कई संगीत कार्यशालाओं में उनका उपयोग किया जाता है।
भविष्य पर प्रभाव
जणाकी की मृत्यु से भारतीय संगीत में एक युग का अंत दर्शाता है, पर उनका संगीत निरंतर नई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनके द्वारा स्थापित मानक और बहुभाषी गायकी की शैली भविष्य के संगीतकारों के लिए एक स्थायी मार्गदर्शक बनी रहेगी।