कर्नाटक के दिग्गज अभिनेता श्रीनाथ ने मयूरु में महाराजा कॉलेज के मैदान में गायिका एस. जनकी को अंतिम सम्मान दिया। उन्होंने बॉलू और अम्मा के गीतों के बिना अपने करियर की कल्पना नहीं की, यह भावनात्मक बयान दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- श्रीनाथ ने मयूरु में जनकी को अंतिम श्रद्धांजलि दी
- बॉलू‑अम्मा के गीतों ने उनके अभिनय को सहज बनाया
- जनकी के साथ उनका अंतिम फोन संवाद और अनछूटा मिलन
मयूरु – कन्नड़ सिनेमा के दो दिग्गज अभिनेता श्रीनाथ और भरती विश्वनुर्वधन ने रविवार को महाराजा कॉलेज के मैदान में गायिका एस. जनकी के शव के प्रति अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। यह समारोह न केवल एक कलाकार की व्यक्तिगत स्मृति को उजागर करता है, बल्कि कर्नाटक फिल्म उद्योग में जनकी के अमर योगदान को भी रेखांकित करता है।
बॉलू‑अम्मा के गीतों का विशेष महत्व
श्रीनाथ ने भावनात्मक स्वर में कहा, “जो प्यार और गर्मजोशी दर्शकों ने मुझपर बरसाई, वह बॉलू (एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम) और अम्मा (एस. जनकी) के गीतों के कारण ही संभव हुई। इन आवाज़ों ने मेरे अभिनय को सहज बना दिया।” उन्होंने यह भी बताया कि जब वह अपने फिल्मों के गाने सुनते हैं, तो वह अपने अभिनय को नहीं, बल्कि बॉलू‑अम्मा की सुकून भरी आवाज़ों को याद करते हैं, जो दृश्यों को जीवंत बना देती हैं।
जनकी के साथ यादगार संवाद
श्रीनाथ ने जनकी के साथ अपने अंतिम फोन वार्तालाप की भी याद दिलाई। “मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जताई थी, पर वह मुलाकात कभी नहीं हुई। आज इस मंच पर उनका सामना करना मेरे लिए एक अनपेक्षित सच्चाई है,” वह आँसू रोकते हुए बोले। यह बातचीत उनके और जनकी के बीच के बंधन को दर्शाती है, जो वर्षों के सहयोग और मित्रता से गहरा हो गया था।
अमर द्वंद्व: “आकाश दीपवु नीनु… निन्ना कंदगा संतोशवेनु”
श्रीनाथ ने फिल्म पावना गंगा के गीत “आकाश दीपवु नीनु… निन्ना कंदगा संतोशवेनु” को विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसे एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम और एस. जनकी ने गाया था। यह गीत, जो आज भी कन्नड़ संगीत प्रेमियों के बीच प्रिय है, उनके लिए जनकी के साथ सबसे मूल्यवान यादों में से एक बन गया है।
कर्नाटक फिल्म उद्योग में जनकी की विरासत
एस. जनकी, जिन्हें “अम्मा” के नाम से भी जाना जाता है, कन्नड़ सिनेमा में कई दशक तक ग़ज़ल, लव सॉन्ग और भक्ति गीतों की आवाज़ रही हैं। उनके संगीत ने न केवल स्क्रीन पर कहानियों को जीवंत किया, बल्कि कई कलाकारों के करियर को भी नई दिशा दी। आज उनका निधन कर्नाटक फिल्म जगत में एक बड़ी खाली जगह छोड़ गया है, जिसे भरना कठिन होगा।