कोलकाता में स्थापित नई उत्तम कुमार प्रतिमा को कला जगत ने ‘असफल’ और ‘उपहास्यजनक’ कहा। कलाकारों और विपक्षी नेताओं ने तुरंत हटाने की मांग की है।
Key Takeaways
- उत्तम कुमार की नई प्रतिमा को कलाकारों ने कला नहीं माना
- राजनीतिक हस्तक्षेप से निर्माण प्रक्रिया पर सवाल
- विरोधी दल और जनता ने हटाने की मांग की
प्रमुख विवरण
कोलकाता के केओराटाला श्मशान में 24 जुलाई को स्थापित नई प्रतिमा को पश्चिम बंगाल के कई कलाकारों ने ‘अपमान’ कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस प्रतिमा का अनावरण किया, परन्तु कलाकारों का कहना है कि यह न तो उत्तम कुमार की सच्ची छवि को दर्शाती है और न ही कला का मानक रखती है।
संतनंद दिंडा, वरिष्ठ कलाकार और मूर्तिकार ने कहा, “यह बहुत ही बदसूरत है; इस काम को करने वाले अक्षम हैं और इसे आदेश देने वाले भी अक्षम हैं। कला को टेंडर के माध्यम से करना बेतुका है।”
विरोधी कांग्रेस के विधायक कुशल घोष ने सोशल मीडिया पर इस प्रतिमा को “हड़बड़ी में स्थापित” होने का आरोप लगाया और बेहतर विकल्प की मांग की। उन्होंने कहा, “जो भी देखेगा, वह कहेगा कि यह महानायक की मूर्ति नहीं हो सकती।”
Historical Background
उत्तम कुमार की पहले की प्रतिमा 1993 में टॉलीगंज में स्थापित की गई थी, जिसे कलाकारों ने उच्च गुणवत्ता के कारण सराहा। पिछले वर्षों में कई सरकारी आदेशों से स्थापित मूर्तियों को गुणवत्ता के अभाव में आलोचना का सामना करना पड़ा, जैसे कि साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर स्थापित फुटबॉल खिलाड़ी की प्रतिमा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that politicized art projects often bypass professional artistic input, leading to public dissatisfaction and erosion of cultural heritage. इस प्रकार की राजनैतिक हस्तक्षेप कला के स्वतंत्र विकास को बाधित कर सकता है।
“सच्ची कला को जनता की भावनाओं को छूना चाहिए, न कि राजनीतिक एजेंडों को पूरा करना चाहिए।” – डॉ. रवींद्र सिंह, कला इतिहासकार
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या नई प्रतिमा को हटाने की कोई प्रक्रिया शुरू हुई है?
उत्तर: अब तक कोई आधिकारिक आदेश नहीं आया है, परंतु कई कलाकारों और विपक्षी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से हटाने की मांग की है।
प्रश्न 2: इस प्रतिमा के निर्माण में कौन जिम्मेदार था?
उत्तर: प्रतिमा का निर्माण एक सरकारी टेंडर के माध्यम से हुआ, जिसमें कलाकारों की भागीदारी नहीं थी।