मशहूर पार्श्व गायिका मधुबंती बागची ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को संगीत के लिए खतरा नहीं बल्कि एक 'परेशान करने वाली' चीज़ बताया है। उन्होंने फिल्म 'धुरंधर' के लिए उषा उत्थुप के क्लासिक गीत को पुनर्जीवित करने और संगीत उद्योग की चुनौतियों पर खुलकर बात की है।

मुख्य बातें

  • मधुबंती बागची ने AI को संगीत की भावनाओं को समझने में असमर्थ और 'बेवकूफ' बताया।
  • उन्होंने फिल्म 'धुरंधर' के लिए उषा उत्थुप के प्रतिष्ठित गीत 'रंभा हो' को नए अंदाज़ में गाया।
  • गायिका ने संगीत लेबल की व्यावसायिक मानसिकता और कलात्मकता के बीच संघर्ष पर चिंता जताई।
  • बागची ने अपने अनुबंधों में AI के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की बात कही है।

बॉलीवुड की उभरती हुई और बहुमुखी पार्श्व गायिका मधुबंती बागची ने हाल ही में संगीत उद्योग में बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। 'धुरंधर' और 'कॉकटेल 2' जैसी फिल्मों में अपनी जादुई आवाज़ का जादू बिखेरने वाली बागची का मानना है कि AI तकनीकी रूप से आवाज़ की नकल तो कर सकता है, लेकिन वह मानवीय संवेदनाओं और संगीत की आत्मा को कभी नहीं छू सकता।

बागची ने AI को 'डरावना' (unnerving) कहने के बजाय 'परेशान करने वाला' (annoying) बताया है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक बिना वजह कलाकारों पर थोपी जा रही है। अपनी सुरक्षा और कलात्मक अखंडता सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने अपने अनुबंधों में स्पष्ट रूप से संगीत कंपनियों को किसी भी प्रकार के AI संस्करण या पुनरुत्पादन (recreation) बनाने से मना कर दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बहस?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि संगीत उद्योग एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। जहाँ एक ओर तकनीक रचनात्मकता को बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी ओर यह कलाकारों की मौलिकता के लिए खतरा भी बन सकती है। बागची का यह स्टैंड उन हजारों कलाकारों की आवाज है जो अपनी पहचान खोने से डरते हैं।

"AI आवाज़ की नकल कर सकता है, लेकिन वह उस भावना को दोबारा पैदा नहीं कर सकता जो एक जीवित कलाकार अपने गीतों में डालता है।"

फिल्म 'धुरंधर' के लिए उषा उत्थुप के क्लासिक डिस्को एंथम 'रंभा हो' को फिर से रिकॉर्ड करना बागची के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम था। संगीतकार शशांक सचदेव के साथ काम करते हुए, उन्होंने मूल गीत की गरिमा बनाए रखते हुए अपनी खुद की पहचान खोजने का सफल प्रयास किया। राहत की बात यह रही कि मूल गायिका उषा उत्थुप ने भी उनके इस प्रयास की सराहना की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मधुबंती बागची का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उत्तर बंगाल के बलुर्गढ़ से निकलकर इंजीनियरिंग करने और कॉर्पोरेट जगत में काम करने के बाद, उन्होंने संगीत को अपना करियर बनाने का साहसी निर्णय लिया। मुंबई आने के बाद उन्होंने संघर्ष किया और जिंगल्स गाने से लेकर 'स्त्री 2' और 'हीरामंडी' जैसी बड़ी फिल्मों तक का सफर तय किया।

क्या आप जानते हैं?: मधुबंती बागची ने 'स्त्री 2' के सुपरहिट गाने 'आज की रात' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मधुबंती बागची ने AI के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि AI बेवकूफ है क्योंकि यह केवल आवाज़ की नकल करता है, लेकिन संगीत की असली भावना पैदा नहीं कर सकता।

2. 'रंभा हो' गीत का नया संस्करण किस फिल्म के लिए है?
यह गीत आदित्य धर की आगामी फिल्म 'धुरंधर' के लिए है।