मणिपुर के 1930 से 1960 के दशक के बीच के 15 दुर्लभ 8mm सेल्युलाइड रील्स को इटली में डिजिटल रूप से संरक्षित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक पहल राज्य की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करेगी।

मुख्य बिंदु

  • मणिपुर के 15 दुर्लभ 8mm सेल्युलाइड रील्स का इटली में डिजिटलीकरण किया जाएगा।
  • ये फुटेज 1930 से 1960 के बीच के मणिपुर की जीवनशैली को दर्शाते हैं।
  • इम्फाल स्थित S.N. चंद सिने आर्काइव एंड म्यूजियम और इटली के होम मूवीज फाउंडेशन के बीच सहयोग।
  • यह परियोजना लोकटक झील और पारंपरिक नाव दौड़ जैसे सांस्कृतिक दृश्यों को सुरक्षित करेगी।

आज के स्मार्टफोन और शॉर्ट वीडियो के युग में, मणिपुर एक ऐसे दौर में वापस जा रहा है जो लगभग एक सदी पुराना है। मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू हुई है, जिसके तहत 1930 के दशक के मध्य से 1960 के दशक की शुरुआत के बीच शूट किए गए 15 दुर्लभ 8mm सेल्युलाइड रील्स को इटली में डिजिटल रूप से संरक्षित किया जाएगा।

इम्फाल स्थित एस.एन. चंद सिने आर्काइव एंड म्यूजियम (SNCCAM) ने इटली के बोलोग्ना स्थित होम मूवीज फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाया है। इन रील्स में महाराज कुमार प्रियब्रत सिंह और कोंगबैलैत्पम इबोहाल शर्मा द्वारा फिल्माए गए दृश्य शामिल हैं, जो मणिपुरी सिनेमा के औपचारिक उदय से बहुत पहले के हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल फिल्म का डिजिटलीकरण नहीं है, बल्कि एक लुप्त होती सभ्यता का डिजिटल पुनर्जन्म है। मणिपुर राज्य फिल्म विकास सोसायटी (MSFDS) के सचिव सुनज़ू बछस्पतिमायूम ने बताया कि भारत में इस तरह के विंटेज रील्स को डिजिटाइज़ करने की सुविधाएं सीमित हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।

यह परियोजना मणिपुर के सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक दृश्य प्रमाण के रूप में सुरक्षित करेगी।

इन रील्स में लोकटक झील के परिदृश्य, पारंपरिक नाव दौड़ और तत्कालीन सामाजिक प्रथाओं के अनमोल दृश्य मौजूद हैं। यह परियोजनाJohnson Rajkumar के प्रयासों का परिणाम है, जो इटली में फिल्म बहाली (Film Restoration) प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले एकमात्र भारतीय थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मणिपुर में फिल्म निर्माण की जड़ें बहुत गहरी हैं। एम.के. प्रियब्रत सिंह ने 1935 में ही अपने बेल एंड हॉवेल 8mm कैमरे का उपयोग करना शुरू कर दिया था। ये फिल्में व्यावसायिक सिनेमा के बजाय उस समय के बदलते मणिपुर का एक जीवंत दृश्य रिकॉर्ड हैं।

क्या आप जानते हैं?: मणिपुरी सिनेमा की स्वर्ण जयंती मनाने के लिए ही अप्रैल 2021 में एस.एन. चंद सिने आर्काइव एंड म्यूजियम की स्थापना की गई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ये रील्स कितनी पुरानी हैं?
ये रील्स 1930 के दशक के मध्य से लेकर 1960 के दशक की शुरुआत तक की हैं।

2. इनका संरक्षण इटली में ही क्यों किया जा रहा है?
भारत में विंटेज सेल्युलाइड रील्स के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डिजिटलीकरण की उन्नत सुविधाएं और विशेषज्ञता की कमी है।