अपनी आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान, नयनतारा ने 2005 की फिल्म 'रापकाल' की यादें साझा कीं। हालांकि, यह फिल्म अब अपनी समस्याग्रस्त कहानी के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
- नयनतारा ने फिल्म 'रापकाल' में निर्देशक गीतु मोहनदास के साथ अपने 20 साल पुराने काम को याद किया।
- एक समय ब्लॉकबस्टर रही यह फिल्म अब 'टॉक्सिक' व्यवहार को सामान्य दिखाने के कारण ट्रोल की जा रही है।
- आधुनिक दर्शक फिल्म के नायक की सीमाओं के उल्लंघन और पुरानी सोच की आलोचना कर रहे हैं।
बेंगलुरु में अपनी आगामी फिल्म टॉक्सिक (Toxic) के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान, सुपरस्टार नयनतारा ने पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने 20 साल पहले निर्देशक गीतु मोहनदास के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। नयनतारा ने बताया कि उस समय वह अभिनय की दुनिया में नई थीं, जबकि गीतु मोहनदास एक कलाकार थीं और उन्होंने शायद तब सोचा भी नहीं होगा कि वह एक दिन निर्देशक बनेंगी।
साल 2005 में आई कमल द्वारा निर्देशित फिल्म रापकाल में ममूटी मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म उस समय एक बड़ी हिट साबित हुई थी, जिस दौर में ममूटी की राजमानिक्यम और नेरारियन सीबीआई जैसी फिल्में भी धमाल मचा रही थीं। फिल्म की कहानी एक संपन्न हिंदू परिवार के घर में काम करने वाले कृष्णन (ममूटी) और घर की मुखिया सरस्वतीयम्मा (सारादा) के बीच के भावनात्मक बंधन पर आधारित थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'रापकाल' इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे समय के साथ सिनेमाई दृष्टिकोण बदल जाते हैं। जिस फिल्म को दो दशक पहले 'मासूमियत' और 'भावनात्मक पवित्रता' के लिए सराहा गया था, आज उसे मनोवैज्ञानिक सीमाओं और सामाजिक विषाक्तता (toxicity) के नजरिए से देखा जा रहा है। यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी अब पुरानी फिल्मों का पुनर्मूल्यांकन कर रही है।
फिल्म में कृष्णन को एक मासूम और अनपढ़ व्यक्ति के रूप में दिखाया गया था, लेकिन आज के दर्शक उसके व्यवहार को 'दखलअंदाजी' मान रहे हैं। बिना अनुमति के लाइट बंद कर देना या परिवार की निजी बैठकों में बिना बुलाए घुसकर अपनी राय देना, जो कभी 'निस्वार्थ प्रेम' लगता था, अब व्यक्तिगत स्पेस का उल्लंघन माना जा रहा है।
'रापकाल' का एक मास्टरपीस से मीम मटेरियल बनना यह साबित करता है कि 'मासूम नायक' का किरदार अक्सर सामाजिक सीमाओं की कमी को छुपाने का एक तरीका था।
सिर्फ कृष्णन ही नहीं, बल्कि सरस्वतीयम्मा के चरित्र की भी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि उन्होंने कृष्णन की पहचान को केवल घर के काम तक सीमित रखा और उसे कभी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित नहीं किया। यह रिश्ता ऊपर से माँ-बेटे जैसा दिखता था, लेकिन वास्तव में यह एक शोषणकारी चक्र था जिसने नायक को मानसिक रूप से स्थिर रखा।
इसके अलावा, फिल्म में शहरी निवासियों को केवल भौतिकवादी और संवेदनहीन दिखाकर एक रूढ़िवादी तुलना पेश की गई थी। आज के परिष्कृत दर्शकों के लिए यह कहानी बहुत सरल और पुरानी लगती है। जो कभी मूल्यों का टकराव था, वह अब केवल एक कमजोर पटकथा का हिस्सा नजर आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रापकाल को अब ट्रोल क्यों किया जा रहा है?
फिल्म को इसलिए ट्रोल किया जा रहा है क्योंकि आधुनिक दर्शक नायक के दखल देने वाले व्यवहार और फिल्म द्वारा दिखाए गए विषाक्त रिश्तों को समस्याग्रस्त मानते हैं।
फिल्म में नयनतारा की क्या भूमिका थी?
नयनतारा ने फिल्म में गौरी की मुख्य भूमिका निभाई थी, जो पुश्तैनी घर में नायक की सहायक के रूप में शामिल होती है।