मद्रास उच्च न्यायालय ने अभिनेता रवि मोहन के प्रोडक्शन हाउस को राहत देते हुए एक अंतरिम रोक जारी की है। एक शराब कंपनी ने 'ब्रो कोड' नाम के ट्रेडमार्क के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने अभिनेता रवि मोहन के प्रोडक्शन हाउस के पक्ष में अंतरिम रोक जारी की।
- नई दिल्ली स्थित 'इंडो बेव्स प्राइवेट लिमिटेड' ने फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई थी।
- न्यायालय ने कंपनी को फिल्म के वितरण और मार्केटिंग में बाधा डालने से रोका है।
- विवाद का मुख्य कारण 'ब्रो कोड' नाम का ट्रेडमार्क उपयोग है।
दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के लोकप्रिय अभिनेता रवि मोहन के आगामी प्रोजेक्ट 'ब्रो कोड' (Bro Code) को एक गंभीर कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। नई दिल्ली स्थित अल्कोहलिक बेवरेजेस कंपनी, इंडो बेव्स प्राइवेट लिमिटेड (Indo Bevs Private Limited), ने रवि मोहन स्टूडियोज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलते हुए 'ब्रो कोड' ट्रेडमार्क के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।
हालांकि, इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने प्रोडक्शन हाउस के पक्ष में एक महत्वपूर्ण अंतरिम रोक (interim injunction) जारी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इंडो बेव्स कंपनी फिल्म के उत्पादन, प्रचार, मार्केटिंग, वितरण या रिलीज में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी और न ही वितरकों, प्रदर्शकों या ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को धमकाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सितंबर 2025 में इंडो बेव्स ने रवि मोहन स्टूडियोज को एक ईमेल भेजकर फिल्म का शीर्षक बदलने की मांग की। कंपनी का दावा है कि 'ब्रो कोड' नाम उनके एनर्जी ड्रिंक और कार्बोनेटेड वाइन उत्पाद के लिए एक पंजीकृत ट्रेडमार्क है। हालांकि, रवि मोहन के वकील एस. कार्तिकेय बालन ने तर्क दिया कि कंपनी का ट्रेडमार्क पंजीकरण अभी भी लंबित है और इस पर आपत्तियां उठाई गई हैं, इसलिए वे बिना किसी आधार के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकते।
फिल्म 'ब्रो कोड' एक एक्शन-कॉमेडी है जिसमें एस.जे. सूर्या जैसे बड़े सितारे शामिल हैं। फिल्म के टीज़र को जबरदस्त सफलता मिली है, जिसे अगस्त 2025 में रिलीज होने के बाद 11 मिलियन से अधिक व्यूज प्राप्त हुए थे।
BozokMedia विश्लेषण: यह क्यों मायने रखता है?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि फिल्म उद्योग और कॉर्पोरेट ट्रेडमार्क के बीच बढ़ते संघर्ष अक्सर बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स को जोखिम में डाल देते हैं। यदि ट्रेडमार्क विवादों का समाधान समय पर नहीं होता है, तो यह न केवल फिल्म की रिलीज को प्रभावित करता है, बल्कि निवेशकों और वितरण भागीदारों के भरोसे को भी तोड़ सकता है। यह मामला बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की जटिलताओं को उजागर करता है।
ट्रेडमार्क कानून के तहत, केवल पंजीकरण की प्रक्रिया में होने से किसी कंपनी को दूसरे के रचनात्मक कार्य को रोकने का अधिकार नहीं मिल जाता जब तक कि अधिकार सिद्ध न हो जाएं।
न्यायालय ने प्रोडक्शन कंपनी को निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर कंपनी को नोटिस तामील कराएं, अन्यथा अंतरिम आदेश को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का कारण 'ब्रो कोड' नामक शब्द का उपयोग है, जिसे एक पेय पदार्थ कंपनी अपना ट्रेडमार्क मानती है।
2. अदालत का फैसला क्या है?
अदालत ने फिल्म के प्रचार और वितरण में कंपनी के हस्तक्षेप पर तीन सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगा दी है।