महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची विज्ञापन के संबंध में नोटिस जारी किया है। यह मामला सरोगेट विज्ञापन और प्रतिबंधित पान मसाला के प्रचार के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
- महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
- आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन प्रतिबंधित पान मसाला के 'सरोगेट विज्ञापन' के रूप में किया जा रहा है।
- FSS अधिनियम की धारा 53 के तहत भ्रामक विज्ञापनों के लिए 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- अभिनेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 'विमल इलायची' के विज्ञापन को लेकर नोटिस भेजा गया है। सवाल यह उठता है कि क्या एक राज्य स्तरीय खाद्य नियामक संस्था के पास इन सितारों को ऐसे उत्पाद के प्रचार के लिए जिम्मेदार ठहराने की शक्ति है, जिसे वह 'सरोगेट विज्ञापन' (परोक्ष विज्ञापन) मान रही है?
विवाद की जड़ 'बोलो जुबान केसरी' टैगलाइन में है। FDA का आरोप है कि इलायची के नाम पर किया जा रहा यह विज्ञापन वास्तव में प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड का प्रचार करने का एक तरीका है। चूंकि महाराष्ट्र में पान मसाला पर प्रतिबंध है, इसलिए FDA इसे कानून का उल्लंघन मान रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की कानूनी सीमा को भी परिभाषित करेगा। यदि FDA सफल होता है, तो भविष्य में ब्रांड एंबेसडर के लिए विज्ञापन के नियमों का पालन करना और भी कठिन हो जाएगा।
यह मामला कानूनी रूप से एक 'ग्रे ज़ोन' में है, जहाँ FDA एक नए कानूनी तर्क का परीक्षण कर रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, FDA ने खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 की धारा 24 और 53 का हवाला दिया है। धारा 53 भ्रामक खाद्य विज्ञापनों के प्रकाशन में शामिल किसी भी पक्ष पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान करती है। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील संकल्प राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि FDA स्वयं जुर्माना नहीं लगा सकता; इसके लिए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट स्तर के अधिनिर्णायक अधिकारी की आवश्यकता होती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि FSS अधिनियम में 'एंडोर्सर' (प्रचारक) शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है, जबकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में ऐसा है। FDA यहाँ यह तर्क दे रहा है कि अभिनेता विज्ञापन के प्रकाशन में एक 'पक्ष' (party to the publication) हैं।
Frequently Asked Questions
1. क्या अभिनेता विज्ञापन हटाने के लिए बाध्य हैं?
नोटिस में अभिनेताओं से कहा गया है कि वे विमल का प्रचार बंद करें और अपने सोशल मीडिया से संबंधित सामग्री हटाएं।
2. क्या इस मामले में जेल हो सकती है?
वर्तमान में यह एक 'कारण बताओ' नोटिस है, जिसमें मुख्य रूप से भारी जुर्माने का प्रावधान है।