सीएस राव द्वारा लिखित और रोहित राज अकुला द्वारा निर्देशित 'ऊरू उम्मदी बाथुकुलु' ग्रामीण शोषण और सामंती उत्पीड़न की एक मार्मिक गाथा है। तेलंगाना बोली के आधुनिक पुट के साथ, यह नाटक दर्शकों को एक असहज लेकिन आवश्यक सामाजिक सच्चाई से रूबरू कराएगा।

  • 'ऊरू उम्मदी बाथुकुलु' नाटक ग्रामीण शोषण और सामंती अन्याय पर आधारित है।
  • निर्देशक रोहित राज अकुला ने इसे समकालीन दर्शकों के लिए तेलंगाना बोली में ढाला है।
  • यह नाटक 23 अगस्त को हैदराबाद के निशुंभिता स्कूल ऑफ ड्रामा में प्रदर्शित किया जाएगा।

हैदराबाद के रंगमंच पर एक ऐसी कहानी दस्तक दे रही है जो समाज के उन अंधेरे कोनों को उजागर करती है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। सीएस राव द्वारा लिखित और धर्मी थिएटर अकादमी के निर्देशक रोहित राज अकुला द्वारा निर्देशित नाटक, 'ऊरू उम्मदी बाथुकुलु', शोषण और अन्याय के विरुद्ध एक सशक्त आवाज बनकर उभर रहा है। यह नाटक 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही गहरी है जितनी तब थी।

सामंती उत्पीड़न की एक दर्दनाक गाथा

नाटक की कहानी एक ग्रामीण परिवेश में रची-बसी है, जहाँ 'पेड्डा डोरा' और 'चिन्ना डोरा' नामक दो स्थानीय अत्याचारी पात्र सत्ता का दुरुपयोग करते हैं। ये पात्र समाज के सबसे कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। नाटक का एक हृदयविदारक मोड़ तब आता है जब वे गंडय्या की शिक्षित पत्नी, सीता का शोषण करते हैं। अंततः, इसी दमन के विरुद्ध गंडय्या का विद्रोह फूटता है, जो अन्याय के खिलाफ एक हिंसक लेकिन अपरिहार्य क्रांति का प्रतीक है। लेखक सीएस राव ने इन अत्याचारियों की तुलना गांव के 'दो रावणों' से की है।

कलात्मक दृष्टि और आधुनिक रूपांतरण

निर्देशक रोहित राज अकुला, जो 2026 में थिएटर में एक दशक पूरा कर रहे हैं, ने इस नाटक को आधुनिक दर्शकों के लिए विशेष रूप से तैयार किया है। उन्होंने इसमें तेलंगाना बोली का समावेश किया है ताकि ग्रामीण परिवेश की वास्तविकता और जीवंतता को महसूस किया जा सके। लगभग डेढ़ घंटे के इस मंचन में पृष्ठभूमि में वाद्य संगीत का उपयोग किया गया है, जो दर्शकों को पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश में डुबो देता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि समकालीन समाज में भी हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ शोषण के मामले कम नहीं हुए हैं। यह नाटक केवल एक कलात्मक प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह उन सामाजिक वास्तविकताओं का दर्पण है जो आज भी मीडिया रिपोर्टों में देखने को मिलती हैं। यह दर्शकों को उनके 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर निकालकर सोचने पर मजबूर करता है।

यह नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के अन्यायपूर्ण ढांचे पर एक कड़ा प्रहार है।
Did You Know?: इस नाटक की कहानी इतनी प्रभावशाली है कि इसे पहले एक फिल्म के रूप में भी बनाया जा चुका है और यह अकादमिक शोध का विषय भी रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यह नाटक कहाँ और कब आयोजित किया जा रहा है?
उत्तर: यह नाटक 23 अगस्त को शाम 7 बजे से हैदराबाद के निशुंभिता स्कूल ऑफ ड्रामा ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा।

प्रश्न 2: इस नाटक का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य विषय ग्रामीण क्षेत्रों में सामंती व्यवस्था के तहत होने वाला शोषण और उसके विरुद्ध होने वाला विद्रोह है।