लेखिका और कवयित्री मीना कंडसामी ने 'द हिंदू' के लिट फॉर लाइफ इवेंट में कहा कि भारत में दक्षिणपंथी 'मैनोस्फीयर' संगठित ट्रोलिंग के जरिए राजनीतिक शक्ति हथियाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने डिजिटल युग में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते ऑनलाइन उत्पीड़न और एआई के खतरों पर भी चिंता जताई।

  • भारतीय 'इन्सेल' पश्चिमी अवधारणा से भिन्न हैं और संगठित ट्रोलिंग का हिस्सा हैं।
  • दक्षिणपंथी 'मैनोस्फीयर' राजनीतिक शक्ति हासिल करने के लिए 'ट्रोल फार्म' का उपयोग कर रहा है।
  • एआई (AI) के बढ़ते उपयोग से महिलाओं की डिजिटल निजता और गरिमा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
  • मीना कंडसामी ने अपनी नई पुस्तक 'Fieldwork as a Sex Object' पर चर्चा की।

प्रसिद्ध लेखिका और कवयित्री मीना कंडसामी ने हाल ही में चेन्नई में आयोजित 'द हिंदू' के 'लिट फॉर लाइफ अनप्लग्ड' (Lit for Life Unplugged) कार्यक्रम में भारतीय राजनीति और इंटरनेट संस्कृति के एक गहरे और अंधेरे पहलू पर रोशनी डाली। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में 'इन्सेल' (incel) की परिभाषा पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग है। जहाँ पश्चिम में इन्सेल को एक अकेले और सामाजिक रूप से कटे हुए व्यक्ति के रूप में देखा जाता है, वहीं भारत में यह एक संगठित और 'कॉर्पोरेट' तरीके से काम करने वाला समूह है।

कंडसामी के अनुसार, भारतीय दक्षिणपंथी 'मैनोस्फीयर' (manosphere) वास्तव में 'चाड्स' (अल्फा मेल का इंटरनेट स्लैंग) से भरा हुआ है। ये समूह अकेले काम नहीं करते, बल्कि ट्रोल फार्म और समन्वित हमलों के माध्यम से राजनीतिक शक्ति पर कब्जा करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने बताया कि यह केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल स्पेस में बढ़ता यह ध्रुवीकरण केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक विमर्श और महिलाओं की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। संगठित ट्रोलिंग के जरिए किसी भी आवाज को दबाना आधुनिक लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

भारतीय दक्षिणपंथी आंदोलन और मैनोस्फीयर समन्वित हमलों और ट्रोल फार्मों के माध्यम से राजनीतिक शक्ति हथियाने का प्रयास कर रहे हैं।

अपनी नई पुस्तक 'Fieldwork as a Sex Object' के बारे में बात करते हुए, कंडसामी ने इंटरनेट पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले निरंतर उत्पीड़न का जिक्र किया। उन्होंने 2019 के चर्चित पोलची यौन शोषण मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि इंटरनेट पर महिलाएं अक्सर 'बदनाम' या 'बुरे' के रूप में चित्रित की जाती हैं। उन्होंने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में किसी भी महिला की गरिमा को डिजिटल रूप से नष्ट करना अब बहुत आसान हो गया है, जिससे महिला एजेंसी का विचार ही खतरे में पड़ गया है।

मीना कंडसामी ने 'मी टू' (#MeToo) आंदोलन पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नारीवाद को सभी राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों को अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज हमें चुप कराने की कोशिश करेगा, लेकिन हमें विरोध करने के नए तरीके खोजने होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक राजनीतिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी अपनी निजता और जीवन की परवाह किए बिना लड़ते हैं, जबकि दिखावा करने वाले लोग केवल सतही समर्थन देते हैं।

Did You Know?: 'इन्सेल' (Incel) शब्द का अर्थ 'Involuntary Celibate' है, जिसका उपयोग उन पुरुषों के लिए किया जाता है जो साथी पाने में असमर्थ महसूस करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. मीना कंडसामी ने 'इन्सेल' के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारतीय इन्सेल पश्चिमी देशों की तरह अकेले नहीं हैं, बल्कि वे संगठित ट्रोलिंग के जरिए राजनीतिक शक्ति पाने की कोशिश करते हैं।

2. एआई (AI) महिलाओं के लिए खतरा क्यों है?
कंडसामी के अनुसार, एआई का उपयोग करके किसी भी महिला की छवि को बिना उसकी सहमति के विकृत या नग्न किया जा सकता है।