सैयारा फेम अभिनेता राजेश कुमार ने आध्यात्मिक प्रेरणा से खेती की शुरुआत की, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक तंगी ने उन्हें 2 करोड़ रुपये के कर्ज में डुबो दिया। इस संघर्ष के बावजूद, राजेश का दृष्टिकोण बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक है।
- अभिनेता राजेश कुमार ने अभिनय छोड़कर बिहार में बागवानी (Horticulture) शुरू की।
- बाढ़, महामारी और गिरते जलस्तर के कारण उन्हें 2 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
- आध्यात्मिक दृष्टिकोण के कारण वे डिप्रेशन का शिकार नहीं हुए और अब कर्ज से बाहर निकल रहे हैं।
मनोरंजन जगत के जाने-माने चेहरे और 'सैयारा' फेम अभिनेता राजेश कुमार ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का खुलासा किया है। साल 2017 में, जब उनका करियर अपने चरम पर था, उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने ग्लैमर की दुनिया को अलविदा कहकर अपने गृह राज्य बिहार लौटने और खेती करने का फैसला किया। यह निर्णय किसी व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के प्रति उनके समर्पण और उनके विचारों से प्रेरित था।
सद्गुरु की प्रेरणा और एक बड़ा जोखिम
राजेश कुमार ने बताया कि ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रमों और सद्गुरु के 'रैली फॉर रिवर्स' अभियान ने उनकी सोच बदल दी। सद्गुरु का आह्वान था कि युवा खेती की ओर लौटें ताकि कृषि का चेहरा बदला जा सके। राजेश ने इसे केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में लिया। उन्होंने सोचा कि किसानों को केवल उपदेश देने के बजाय, उन्हें खुद मिट्टी और चुनौतियों का सामना करना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने बागवानी (Horticulture) में कदम रखा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मनोरंजन उद्योग से कृषि क्षेत्र में संक्रमण केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक संदेश है। जब एक सेलिब्रिटी जमीनी स्तर पर उतरता है, तो वह कृषि की वास्तविक समस्याओं जैसे कीटनाशकों का उपयोग और जल संकट को बेहतर ढंग से समझ सकता है। राजेश का यह कदम दिखाता है कि कैसे आध्यात्मिकता व्यक्ति को जोखिम लेने का साहस देती है।
"जिस दिन आप दूसरों के बारे में सोचना शुरू करते हैं, दूसरे आपके बारे में सोचना शुरू कर देते हैं" - राजेश कुमार का यह दर्शन उनके संघर्ष का आधार बना।
राजेश का यह सफर बाधाओं से भरा रहा। पहले 35 वर्षों में आई भीषण बाढ़ ने उनकी पहली फसल बर्बाद कर दी। उन्होंने हार नहीं मानी और 15,000 नए पेड़ लगाए। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कोविड-19 महामारी और उसके बाद गिरते भूजल स्तर (Water Table) ने उनकी कमर तोड़ दी। बोरवेल खोदने के बावजूद पानी नहीं मिला, जिससे उनकी जमा पूंजी डूब गई और वे 2 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दब गए।
आध्यात्मिकता बनाम आर्थिक तंगी
इतनी बड़ी वित्तीय विफलता के बावजूद, राजेश कुमार ने एक ऐसी बात कही जो समाज के लिए मिसाल है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता ने उन्हें अवसाद (Depression) या क्रोध में डूबने नहीं दिया। वे अपनी स्थिति को 'नाकामी' के बजाय एक 'सीख' के रूप में देखते हैं। आज उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और वे अपने कुल कर्ज का लगभग 85-90% चुका चुके हैं।
Frequently Asked Questions
1. राजेश कुमार ने खेती क्यों शुरू की?
सद्गुरु की प्रेरणा और किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने के लिए उन्होंने खेती शुरू की।
2. राजेश कुमार को कितना नुकसान हुआ?
प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के कारण उन्हें लगभग 2 करोड़ रुपये का कर्ज झेलना पड़ा।