कमल अमरोही के बेटे ताजदार अमरोही ने फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के लेखन और के आसिफ के साथ हुए विवाद पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता ने उस दौर में प्रति सीन भारी रकम वसूली थी।

  • कमल अमरोही ने 'मुगल-ए-आजम' के लिए प्रति सीन 10,000 रुपये चार्ज किए थे।
  • निर्देशक के आसिफ के साथ क्रेडिट को लेकर विवाद हुआ था।
  • उस दौर में लेखक 'मुंशी' कहलाते थे और बहुत कम कमाते थे।
  • अमरोही ने फिल्म के लिए कुल लगभग 2 लाख रुपये कमाए थे।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'मुगल-ए-आजम' एक मील का पत्थर मानी जाती है। लेकिन इस महान कृति के पीछे एक गहरा विवाद और अनसुनी कहानी छिपी है। कमल अमरोही के बेटे, ताजदार अमरोही ने हाल ही में फिल्म के लेखन और निर्देशक के आसिफ के साथ उनके पिता के बीच हुए टकराव के बारे में चौंकाने वाले तथ्य साझा किए हैं।

ताजदार के अनुसार, कमल अमरोही ने इस फिल्म के लिए प्रति दृश्य (scene) 10,000 रुपये की मांग की थी, जो उस समय के हिसाब से एक बहुत बड़ी राशि थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में फिल्म उद्योग में लेखकों को 'मुंशी' कहा जाता था और उनकी कमाई मात्र 200 से 4,000 रुपये के बीच होती थी। कमल अमरोही ने लेखकों के स्तर को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेखन क्रेडिट पर विवाद

विवाद का मुख्य कारण फिल्म के क्रेडिट्स थे। ताजदार का दावा है कि हालांकि फिल्म के संवाद और लेखन पूरी तरह से कमल अमरोही का था, लेकिन निर्देशक के आसिफ ने उन्हें अकेले श्रेय नहीं दिया। फिल्म के क्रेडिट में वजाहत मिर्जा और अमन खान जैसे अन्य नामों को भी शामिल किया गया था। ताजदार के अनुसार, के आसिफ नहीं चाहते थे कि लोग यह समझें कि पूरी फिल्म केवल अमरोही ने लिखी है।

"मेरे पिता की लेखन शैली अत्यंत अद्वितीय थी, और स्वयं पृथ्वीराज कपूर उनके लेखन के बहुत बड़े प्रशंसक थे।"

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल पैसों का नहीं बल्कि कलात्मक पहचान और सम्मान का था। जब के आसिफ को एहसास हुआ कि वे अमरोही के बिना फिल्म पूरी नहीं कर सकते, तो उन्होंने मध्यस्थता के जरिए उन्हें वापस बुलाया, लेकिन अमरोही ने अपनी शर्तों पर काम करने की जिद की।

ऐतिहासिक संदर्भ: लेखकों का बदलता स्वरूप

फिल्म निर्माण के शुरुआती दशकों में, पटकथा लेखकों को अक्सर हाशिए पर रखा जाता था। उन्हें 'मुंशी' के रूप में देखा जाता था जो केवल कागजी काम करते थे। कमल अमरोही जैसे दिग्गजों ने इस धारणा को बदला और लेखन को एक सम्मानित पेशा बनाया। 'मुगल-ए-आजम' की भव्यता जितनी उसके दृश्यों में थी, उतनी ही उसकी भाषा और संवादों में भी थी, जो अमरोही की कलम की देन थी।

Did You Know?: 'मुगल-ए-आजम' का बजट उस समय 1.5 करोड़ रुपये था, जो आज के मुद्रास्फीति के अनुसार 150 करोड़ रुपये से अधिक होगा।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कमल अमरोही ने 'मुगल-ए-आजम' के लिए कितने पैसे लिए थे?
उत्तर: उन्होंने प्रति सीन 10,000 रुपये लिए थे और कुल मिलाकर लगभग 2 लाख रुपये कमाए थे।

प्रश्न 2: के आसिफ और कमल अमरोही के बीच विवाद क्यों हुआ था?
उत्तर: विवाद मुख्य रूप से लेखन के श्रेय (writing credits) को लेकर था, क्योंकि के आसिफ अन्य लेखकों के नाम भी शामिल करना चाहते थे।