शिवमोगा में आयोजित गजल कवियों के सम्मेलन में प्रसिद्ध कवयित्री साविता नागभूषण ने कहा कि कविता का मूल उद्देश्य मानवता, प्रेम और शांति को बढ़ावा देना है। उन्होंने गजल को समर्पण की एक अनूठी विधा बताया।
- कवयित्री साविता नागभूषण ने कहा कि कविता और शांति एक-दूसरे के पूरक हैं।
- गजल को 'निवेदन काव्य' के रूप में परिभाषित किया गया, जो प्रेम पर आधारित है।
- सम्मेलन में सांप्रदायिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया गया।
- रत्ना के. भट्ट को गालिब पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
शिवमोगा, कर्नाटक: कर्नाटक गजल अकादमी द्वारा आयोजित गजल कवियों के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में, प्रसिद्ध कवयित्री सावित्रा नागभूषण ने साहित्य की वैश्विक भूमिका पर गहरा विचार साझा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया भर के कवि एक ही उद्देश्य से जुड़े हैं—शांति, प्रेम और मानवता का प्रसार करना।
नागभूषण ने अपने संबोधन में कहा कि शब्द जैसे 'प्रेम', 'शांति' और 'मानवता' कविता के पर्यायवाची हैं, जबकि युद्ध, अशांति और हताशा इसके विपरीत शब्द हैं। उन्होंने गजल की प्रकृति पर चर्चा करते हुए इसे 'निवेदन काव्य' कहा, जो पूरी तरह से समर्पण और प्रेम की भावना में रचा-बसा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गजल, जो फारस से भारत आई थी, अब कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में भी अपनी पैठ बना रही है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में, साहित्य और कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। जब राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ता है, तो कविता ही वह माध्यम बनती है जो मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखती है।
"जब कविता लिखी जाती है, तो दुनिया को शांति मिलती है; कविता कभी बुराई का पक्ष नहीं ले सकती।"
सम्मेलन के दौरान, पूर्व अध्यक्ष काशीनाथ अंबालागे ने एक गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाली ताकतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाले प्रयासों के खिलाफ आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि सवाल पूछने की क्रिया को अक्सर 'देशविरोधी' करार दिया जाता है, लेकिन उन्होंने युवा पीढ़ी (Gen Z) की जागरूकता पर भरोसा जताया।
ऐतिहासिक संदर्भ
गजल एक ऐसी काव्य विधा है जिसका सफर फारस (Persia) से शुरू होकर भारत के हृदय तक पहुँचा। भारत में, विशेषकर उत्तर कर्नाटक में, यह विधा सदियों से लोकप्रिय रही है। यह केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है जो प्रेम और विरह के माध्यम से ईश्वर और मानवता से जुड़ती है।
Frequently Asked Questions
1. सावित्रा नागभूषण ने गजल को क्या संज्ञा दी?
उन्होंने गजल को 'निवेदन काव्य' कहा, जिसका अर्थ है समर्पण और प्रेम की कविता।
2. इस सम्मेलन में किसे सम्मानित किया गया?
पुत्तूर के रत्ना के. भट्ट को 'गालिब पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।