आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रशिक्षण के लिए दुनिया भर की दुर्लभ और ऐतिहासिक किताबों को खरीदा जा रहा है और फिर उन्हें नष्ट किया जा रहा है। एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के इस चौंकाने वाले तरीके ने सांस्कृतिक विरासत के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • AI मॉडल (जैसे ChatGPT, Claude) को प्रशिक्षित करने के लिए भौतिक किताबों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है।
  • दुर्लभ और ऐतिहासिक किताबों को खरीदकर उन्हें स्कैन किया जा रहा है और फिर नष्ट (pulp) किया जा रहा है।
  • एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों पर 'प्रोजेक्ट पनामा' के तहत दुनिया की किताबों को विनाशकारी रूप से स्कैन करने का आरोप लगा है।
  • कानूनी तौर पर इसे कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना जा रहा है, जिससे सांस्कृतिक विरासत को खतरा बढ़ गया है।

कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहाँ सदियों पुराने दस्तावेज़, वर्जीनिया वुल्फ की लाइब्रेरी की किताबें या रबींद्रनाथ टैगोर के दुर्लभ संस्करण रखे हों। ये केवल कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि मानवता की अनमोल विरासत हैं। लेकिन हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये अनमोल रत्न अब एक नए और खतरनाक शिकारी के निशाने पर हैं: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुर्लभ किताबों की बिक्री में अचानक भारी उछाल आया है। लेकिन ये खरीदार कोई पुस्तक प्रेमी नहीं, बल्कि 'रेड स्पैरो प्रोजेक्ट' और 'ब्लू फिंच प्रोजेक्ट' जैसे रहस्यमयी नाम वाले संगठन हैं। ये संगठन बिना किसी मोलभाव के सैकड़ों किताबें एक साथ खरीदते हैं, जिन्हें लॉजिस्टिक गोदामों में ले जाया जाता है। वहाँ इन किताबों की रीढ़ (spines) काट दी जाती है, उन्हें स्कैन किया जाता है और फिर उन्हें कागज बनाने के लिए नष्ट कर दिया जाता है।

क्यों हो रहा है ऐसा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सब बड़े भाषा मॉडल (LLMs) जैसे Claude, ChatGPT और Gemini को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा रहा है। कंपनियों के लिए डिजिटल कॉपी प्राप्त करने के कॉपीराइट और कानूनी जटिलताओं से निपटने के बजाय, भौतिक किताबें खरीदना, उन्हें स्कैन करना और फिर उन्हें नष्ट कर देना अधिक आसान और सस्ता पड़ता है।

किताबें केवल टेक्स्ट के कंटेनर नहीं हैं, बल्कि वे संस्कृति और इतिहास की जीवित गवाह हैं जिनका विनाश मानवता की सामूहिक स्मृति को मिटा सकता है।

हाल ही में एंथ्रोपिक (Anthropic) से जुड़े एक अदालती मामले ने इस विवाद को और हवा दी है। 'प्रोजेक्ट पनामा' के तहत, कंपनी पर दुनिया की सभी किताबों को 'विनाशकारी रूप से स्कैन' करने की कोशिश करने का आरोप लगा है। हालांकि, अमेरिकी अदालत ने फैसला सुनाया कि एंथ्रोपिक द्वारा कॉपीराइट वाली किताबों का उपयोग करना अपने आप में कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि डिजिटल प्रति का उपयोग कंपनी के बाहर नहीं किया गया।

सांस्कृतिक विरासत बनाम तकनीकी प्रगति

यह मुद्दा केवल तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि हम अपनी रचनात्मकता और मौलिकता को कितना महत्व देते हैं। जब हम किताबों को केवल डेटा के स्रोत के रूप में देखते हैं, तो हम उस ऐतिहासिक संदर्भ और भौतिक अस्तित्व को खो देते हैं जो उन्हें खास बनाता है।

विशेषतापारंपरिक पुस्तक संरक्षणAI डेटा संग्रह प्रक्रिया
उद्देश्यज्ञान और इतिहास को सुरक्षित रखनाLLM प्रशिक्षण के लिए डेटा निकालना
किताबों का भाग्यपुस्तकालयों में सुरक्षित रखनास्कैन के बाद नष्ट (Pulped) करना
दृष्टिकोणसांस्कृतिक विरासत का सम्मानशुद्ध आर्थिक और तकनीकी लाभ

जैसे-जैसे दुनिया LLMs पर अधिक निर्भर होती जा रही है, ऐसे जटिल कानूनी और नैतिक सवाल और भी उठेंगे। क्या हम तकनीक की वेदी पर अपनी सभ्यता के अवशेषों की बलि देने के लिए तैयार हैं?

Frequently Asked Questions

1. AI कंपनियां भौतिक किताबें क्यों नष्ट कर रही हैं?
डिजिटल सामग्री प्राप्त करने के कॉपीराइट विवादों से बचने के लिए, कंपनियां भौतिक किताबें खरीदती हैं, उन्हें स्कैन करती हैं और फिर डेटा प्राप्त करने के बाद उन्हें नष्ट कर देती हैं।

2. क्या यह कानूनी रूप से गलत है?
वर्तमान में, कुछ अदालती फैसलों के अनुसार, यदि डेटा का उपयोग केवल आंतरिक प्रशिक्षण के लिए किया जाता है और डिजिटल प्रति साझा नहीं की जाती, तो इसे कॉपीराइट उल्लंघन नहीं माना गया है।

Did You Know?: कुछ दुर्लभ किताबें इतनी पुरानी होती हैं कि उनका कागज और स्याही अब केवल एक ऐतिहासिक प्रमाण के रूप में जीवित है, न कि केवल पढ़ने के लिए।