संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' से दीपिका पादुकोण के बाहर होने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। निर्माता द्वारा उनके 10% प्रॉफिट शेयर की मांग करने के दावे ने फिल्म जगत में लैंगिक भेदभाव और दोहरे मापदंडों की बहस को फिर से जीवित कर दिया है।
- निर्माता प्रणय रेड्डी वांगा ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण ने फिल्म के मुनाफे में 10% हिस्सेदारी मांगी थी।
- विवाद के केंद्र में दीपिका की कार्य अवधि (8 घंटे) और फिल्म के कुछ पहलुओं पर उनकी असहमति रही है।
- आलोचकों का तर्क है कि पुरुष सितारों द्वारा समान मांगें करने पर उन्हें 'व्यावसायिक' माना जाता है, लेकिन महिलाओं के लिए इसे 'अहंकार' करार दिया जाता है।
संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म 'स्पिरिट' (Spirit) से दीपिका पादुकोण के हटने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि दीपिका फिल्म छोड़ चुकी हैं और उनकी जगह तृप्ति डिमरी ने ले ली है, लेकिन विवाद का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में, फिल्म के निर्माता और वांगा के भाई, प्रणय रेड्डी वांगा ने एक चौंकाने वाला दावा किया है।
प्रणय रेड्डी वांगा के अनुसार, दीपिका पादुकोण केवल पारिश्रमिक ही नहीं, बल्कि फिल्म के मुनाफे में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग कर रही थीं। इसके अलावा, काम के घंटों और अन्य शर्तों को लेकर भी असहमति बनी हुई थी। निर्माता ने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक की गई हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल एक फिल्म के कास्टिंग बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय फिल्म उद्योग में व्याप्त गहरे पितृसत्तात्मक ढांचे को उजागर करता है। जब एक महिला कलाकार अपने काम के घंटों या मुनाफे के हिस्से की मांग करती है, तो उसे अक्सर 'कठिन' या 'अहंकारी' करार दे दिया जाता है, जबकि पुरुष सुपरस्टार्स के लिए यही व्यवहार एक मानक व्यावसायिक प्रक्रिया मानी जाती है।
एक महिला का व्यावसायिक निर्णय लेना अक्सर उसकी नैतिकता और 'नारीवाद' पर सवाल उठाने का बहाना बन जाता है।
इससे पहले, जब 2025 में दीपिका के बाहर होने की खबरें आईं, तो चर्चा का विषय उनके 8 घंटे के वर्किंग डे की मांग थी। एक नई मां के रूप में उन्होंने अपनी सीमाओं को निर्धारित करने की कोशिश की थी, जिसे उद्योग में 'अहंकार' के रूप में देखा गया। दीपिका ने स्वयं एक साक्षात्कार में कहा था कि कई पुरुष सुपरस्टार्स वर्षों से सीमित घंटों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनके लिए कभी ऐसी सुर्खियां नहीं बनीं।
विवाद का दूसरा पहलू फिल्म के कुछ दृश्यों और 'नारीवाद' से जुड़ा रहा है। संदीप रेड्डी वांगा ने भी सोशल मीडिया पर एक संकेत देते हुए पूछा था कि क्या एक महिला का अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना ही उसका 'नारीवाद' है। यह दर्शाता है कि कैसे एक कलाकार के पेशेवर फैसलों को व्यक्तिगत चरित्र और विचारधारा से जोड़ दिया जाता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या दीपिका पादुकोण ने वास्तव में 10% मुनाफे की मांग की थी?
यह निर्माता प्रणय रेड्डी वांगा का दावा है, हालांकि दीपिका की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
2. 'स्पिरिट' फिल्म में दीपिका की जगह किसने ली है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, दीपिका पादुकोण की जगह अब तृप्ति डिमरी फिल्म का हिस्सा हैं।
| मुद्दा | महिला कलाकार का दृष्टिकोण | उद्योग की प्रतिक्रिया |
|---|---|---|
| कार्य के घंटे | पेशेवर सीमाएं और स्वास्थ्य | अहंकार या जिद |
| मुनाफे में हिस्सा | व्यावसायिक निवेश/जोखिम | लालच या अत्यधिक मांग |