टीवी जगत के मशहूर कपल विवेक दहिया ने अपनी पत्नी दिव्यंका त्रिपाठी के जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद के कठिन दौर और पोस्टपार्टम डिप्रेशन की वास्तविकता पर खुलकर बात की है।
- विवेक दहिया ने स्वीकार किया कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) एक गंभीर और वास्तविक मानसिक स्वास्थ्य चुनौती है।
- दिव्यंका त्रिपाठी जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद शारीरिक और हार्मोनल बदलावों से जूझ रही हैं।
- विवेक ने बताया कि वह भावनात्मक सहयोग और घर की जिम्मेदारियां साझा करके अपनी पत्नी की मदद कर रहे हैं।
टेलीविजन के सबसे पसंदीदा जोड़ों में से एक, दिव्यंका त्रिपाठी और विवेक दहिया ने 26 मई, 2026 को जुड़वां बेटों का स्वागत किया था। हालांकि, इस खुशी के साथ-साथ परिवार को कई भावनात्मक और शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हाल ही में एक साक्षात्कार में, विवेक दहिया ने दिव्यंका के प्रसवोत्तर रिकवरी (postpartum recovery) के सफर और माता बनने के बाद आने वाले मानसिक स्वास्थ्य उतार-चढ़ाव पर चर्चा की।
विवेक ने 'हिंदी रश' को दिए इंटरव्यू में पोस्टपार्टम डिप्रेशन को एक 'वास्तविक' समस्या बताते हुए कहा कि प्रसव के बाद महिलाएं कई हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से गुजरती हैं। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि शरीर में होने वाले अचानक बदलाव महिलाओं के आत्मविश्वास को कैसे प्रभावित करते हैं। विवेक के अनुसार, "एक माँ को यह महसूस होने लगता है कि उसका शरीर अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले था। यह स्वीकार करना बहुत कठिन होता है।"
शारीरिक बदलाव और कोर स्ट्रेंथ का नुकसान
दिव्यंका, जो अपनी फिटनेस के लिए जानी जाती हैं, उनके लिए शारीरिक बदलावों को संभालना और भी चुनौतीपूर्ण रहा है। विवेक ने बताया कि जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद दिव्यंका ने अपनी 'कोर स्ट्रेंथ' (core strength) को खो दिया है। उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति नियमित रूप से वर्कआउट करता है, उसके लिए अचानक अपने शरीर को 'जेली' जैसा महसूस करना बहुत मुश्किल होता है। आपकी कोर स्ट्रेंथ ही आपकी ताकत होती है, और उसके बिना जीवन का संतुलन बिगड़ जाता है।"
पोस्टपार्टम डिप्रेशन केवल एक मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल असंतुलन और शारीरिक बदलावों का एक जटिल मेल है जिसे सहानुभूति की आवश्यकता होती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मशहूर हस्तियों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर बात करना समाज में व्याप्त वर्जनाओं (taboos) को तोड़ने में मदद करता है। जब विवेक जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व पोस्टपार्टम डिप्रेशन की बात करते हैं, तो यह लाखों नई माताओं को यह समझने में मदद करता है कि वे इस लड़ाई में अकेली नहीं हैं।
विवेक ने यह भी साझा किया कि मातृत्व के बाद दैनिक जीवन पूरी तरह से बच्चे की देखभाल, जैसे कि दूध पिलाने और नींद के इर्द-गिर्द सिमट जाता है, जिससे महिलाओं के लिए स्वयं के लिए समय निकालना लगभग असंभव हो जाता है।
विवेक कैसे दे रहे हैं सहयोग?
जब विवेक से पूछा गया कि वह इस कठिन समय में दिव्यंका की मदद कैसे कर रहे हैं, तो उन्होंने किसी 'जादुई नुस्खे' का दावा करने के बजाय 'उपस्थिति' (presence) और 'भावनात्मक समर्थन' को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वह केवल उनके पास रहकर और उनकी छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखकर उनकी मदद करते हैं।
विवेक ने जिम्मेदारियों के बंटवारे का एक व्यावहारिक उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि जब दिव्यंका दूध पंप करती हैं, तो वह बोतल से बच्चे को दूध पिलाते हैं। इससे दिव्यंका को महसूस होता है कि वह इस सफर में अकेली नहीं हैं और उनके पति भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है?
यह प्रसव के बाद होने वाला एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है जो हार्मोनल बदलावों के कारण होता है और इसमें अत्यधिक उदासी और चिंता महसूस होती है।
2. विवेक दहिया दिव्यंका की मदद कैसे कर रहे हैं?
विवेक भावनात्मक समर्थन देकर और बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारियां साझा करके उनकी मदद कर रहे हैं।