कंतारा स्टार ऋषभ शेट्टी ने यश की नई फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' के समर्थन में आकर उसे एक 'साहसी प्रयोग' बताया है। फिल्म को मिल रही मिश्रित प्रतिक्रियाओं के बीच ऋषभ ने यश के अभिनय और कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक स्तर पर ले जाने के प्रयास की सराहना की है।
- ऋषभ शेट्टी ने यश की फिल्म 'टॉक्सिक' को एक साहसी सिनेमाई प्रयोग बताया।
- फिल्म को रिलीज के बाद दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।
- ऋषभ ने कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए यश के प्रयासों की प्रशंसा की।
कंतारा फेम अभिनेता और निर्देशक ऋषभ शेट्टी ने यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' के समर्थन में आकर एक बड़ा बयान दिया है। 26 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, लेकिन ऋषभ शेट्टी ने इसे एक 'साहसी प्रयोग' करार देते हुए यश के विजन का बचाव किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए, ऋषभ ने कहा कि एक कलाकार के रूप में, जब आप किसी किरदार को निभाते हैं, तो आप उसे अपने दिल की गहराइयों से जीवंत करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से एक शक्तिशाली व्यक्ति के संघर्ष को जिस दृढ़ता के साथ पर्दे पर उतारा गया है, उसकी सराहना की। ऋषभ का मानना है कि यदि फिल्म की कहानी पारंपरिक रास्तों पर नहीं चल रही है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह रास्ता गलत है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा में अब पारंपरिक 'मसाला' फिल्मों से हटकर प्रयोगवादी कहानियों की ओर बदलाव देखा जा रहा है। जब ऋषभ शेट्टी जैसे बड़े नाम किसी फिल्म का बचाव करते हैं, तो यह फिल्म की कलात्मक विश्वसनीयता को बढ़ाता है, भले ही बॉक्स ऑफिस या समीक्षकों के बीच विवाद बना रहे।
'शायद कथानक और मुख्य पात्र उस सामान्य रास्ते पर नहीं हैं जिस पर अधिकांश फिल्में चलती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह रास्ता गलत है।' - ऋषभ शेट्टी
फिल्म 'टॉक्सिक' को लेकर विवाद का मुख्य कारण इसकी कहानी और महिला पात्रों का चित्रण है। कुछ समीक्षकों का कहना है कि फिल्म ने महिला पात्रों को सशक्त दिखाने का वादा तो किया था, लेकिन वे मुख्य नायक के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गए। हालांकि, ऋषभ ने इन आलोचनाओं के बावजूद फिल्म के निर्माण की विशाल प्रक्रिया और यश के समर्पण को सराहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कन्नड़ सिनेमा, जिसे पहले केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित माना जाता था, 'कांतारा' और 'केजीएफ' जैसी फिल्मों के बाद अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। यश और ऋषभ शेट्टी दोनों ही इस बदलाव के अग्रदूत माने जाते हैं।
Frequently Asked Questions
1. ऋषभ शेट्टी ने 'टॉक्सिक' का समर्थन क्यों किया?
ऋषभ ने इसे एक साहसी प्रयोग माना और यश द्वारा कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक स्तर पर ले जाने के प्रयासों की सराहना की।
2. फिल्म 'टॉक्सिक' की मुख्य आलोचना क्या है?
समीक्षकों का कहना है कि फिल्म में महिला पात्रों को पर्याप्त स्थान और एजेंसी नहीं दी गई है।