1993 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'खलनायक' के गाने 'चोली के पीछे क्या है' पर मचे भारी बवाल और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे द्वारा फिल्म को बचाने की अनसुनी कहानी।

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  • 1993 में 'चोली के पीछे' गाने को लेकर देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था।
  • 32 से अधिक संगठनों ने फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की थी।
  • शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने फिल्म का समर्थन कर विवाद को शांत किया।
  • फिल्म 'खलनायक' बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी।

बॉलीवुड के इतिहास में कुछ गाने ऐसे होते हैं जो न केवल संगीत बल्कि विवादों के कारण भी अमर हो जाते हैं। साल 1993 में आई सुपरहिट फिल्म 'खलनायक' का गाना 'चोली के पीछे क्या है' भी एक ऐसा ही उदाहरण है। माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना उस दौर में जबरदस्त विवादों के घेरे में आ गया था, जिसे 'अश्लील' और 'वल्गर' करार दिया गया था।

मशहूर फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने हाल ही में इस घटनाक्रम का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उस समय स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि देशभर के लगभग 32 संगठनों ने फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विशेष रूप से महिला संगठनों ने पुणे और दिल्ली जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए, जिससे फिल्म की रिलीज पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।

क्यों मचा था इतना बवाल?

सुभाष घई के अनुसार, विरोध का मुख्य कारण गाने के बोल और उसकी प्रस्तुति थी। प्रदर्शनकारी इसे सामाजिक नैतिकता के खिलाफ मान रहे थे। घई ने बताया कि उन्हें डर था कि सेंसर बोर्ड इस गाने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर देगा। उन्होंने इस संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कई संगठनों से मुलाकात की और उन्हें समझाने की कोशिश की कि यह केवल एक 'कलात्मक अभिव्यक्ति' है, लेकिन कोई भी उनकी बात मानने को तैयार नहीं था।

"मैंने उनसे कहा कि कम से कम एक बार फिल्म देख लीजिए, यह वैसी नहीं है जैसा आप सोच रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसे अश्लील करार दिया।" - सुभाष घई

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक गाने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उस समय के बदलते सामाजिक मानदंडों और सिनेमाई स्वतंत्रता के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है।

बाल ठाकरे का ऐतिहासिक हस्तक्षेप

जब मामला हाथ से निकलता दिख रहा था और शिवसेना के कार्यकर्ता भी फिल्म के विरोध में थे, तब सुभाष घई ने एक साहसी कदम उठाया। वे सीधे शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के पास पहुंचे। घई ने ठाकरे से अनुरोध किया कि वे फिल्म को एक बार देखें। बाल ठाकरे ने फिल्म देखी और अगले ही दिन शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में एक ऐसा लेख लिखा जिसने पूरे विवाद की दिशा बदल दी।

ठाकरे ने लिखा कि लोग इस फिल्म और गाने को जिस तरह समझना चाहें, समझ सकते हैं, लेकिन फिल्म खूबसूरत है और 'चोली के पीछे जो है, वो चोली के पीछे ही है।' इस एक बयान ने न केवल फिल्म को कानूनी और सामाजिक संकट से बचाया, बल्कि शिवसेना के कार्यकर्ताओं को भी फिल्म के प्रति नरम रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1990 का दशक बॉलीवुड के लिए बदलाव का दौर था। एक तरफ बड़े बजट की फिल्में आ रही थीं, तो दूसरी तरफ सेंसरशिप और सामाजिक मूल्यों को लेकर कड़े विरोध भी देखने को मिल रहे थे। 'खलनायक' में संजय दत्त, जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित जैसे सितारों ने काम किया था और यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी सफलता साबित हुई थी।

Did You Know?: सुभाष घई ने इस गाने को एक 'लोकगीत' की तरह फिल्माया था, जो बिहार और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक गीतों से प्रेरित था।

Frequently Asked Questions

1. 'चोली के पीछे' गाने पर विवाद क्यों हुआ था?
गाने के बोलों को कई सामाजिक संगठनों ने 'अश्लील' और 'वल्गर' मानकर फिल्म के विरोध में प्रदर्शन किया था।

2. बाल ठाकरे ने फिल्म को कैसे बचाया?
ठाकरे ने फिल्म देखने के बाद अपने मुखपत्र 'सामना' में गाने का समर्थन करते हुए फिल्म की कलात्मकता का बचाव किया था।