नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस मानसी पारेख, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-चीन सीमा पर प्राकृतिक आपदा के बीच फंस गई थीं, सुरक्षित मुंबई लौट आई हैं। एयरपोर्ट पर बेटी के साथ उनका भावुक मिलन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
- एक्ट्रेस मानसी पारेख कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान चीन और नेपाल सीमा पर भारी लैंडस्लाइड और बाढ़ के बीच फंस गई थीं।
- नाइलम शहर में भूस्खलन के कारण उन्हें घंटों बस में इंतजार करना पड़ा और अंततः पैदल रास्ता पार कर नेपाल बॉर्डर पहुंचना पड़ा।
- मुंबई एयरपोर्ट पर पति पार्थिव गोहिल और बेटी निरवी के साथ उनका अत्यंत भावुक पुनर्मिलन हुआ।
गुजराती सिनेमा की प्रख्यात और नेशनल अवॉर्ड विनिंग अभिनेत्री मानसी पारेख पिछले कुछ दिनों से एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति से गुजर रही थीं। सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के तत्वावधान में कैलाश मानसरोवर की आध्यात्मिक यात्रा पर निकलीं मानसी, प्रकृति के रौद्र रूप का शिकार हो गईं। नेपाल और चीन की सीमा पर आए भीषण बाढ़ और भूस्खलन (Landslide) ने सैकड़ों यात्रियों के लिए संकट पैदा कर दिया था, जिसमें मानसी भी शामिल थीं।
सोमवार को जब मानसी मुंबई एयरपोर्ट पर उतरीं, तो वहां का माहौल बेहद भावुक था। उनके पति पार्थिव गोहिल और उनकी छोटी बेटी निरवी उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही मानसी ने अपनी बेटी को देखा, दोनों एक-दूसरे के गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगे। यह वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो एक मां और बच्चे के बीच के गहरे जुड़ाव और संकट के बाद मिलने वाली राहत को दर्शाता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that high-profile spiritual journeys in ecologically sensitive zones like the Himalayas carry immense risks. This incident highlights the volatility of the Nepal-China border regions during monsoon seasons, where infrastructure can collapse in minutes, leaving travelers stranded without communication.
अपनी आपबीती साझा करते हुए मानसी ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि चीन के नाइलम शहर में हुए बड़े लैंडस्लाइड ने उनके सफर को किसी 'जंग' जैसा बना दिया था। उन्होंने बताया कि उन्हें करीब 4 घंटे तक बस में कैद रहना पड़ा और बाद में कई मील का कठिन सफर तय कर, पैदल कीचड़ और मलबे को पार कर नेपाल बॉर्डर तक पहुंचना पड़ा।
"प्राकृतिक आपदाओं के समय मानसिक दृढ़ता और धैर्य ही सबसे बड़े हथियार होते हैं, जो मानसी पारेख के इस कठिन सफर में स्पष्ट रूप से दिखा।"
काठमांडू पहुंचने तक का सफर बेहद उबड़-खाबड़ और डरावना था, लेकिन मानसी का कहना है कि अपनी बेटी को दोबारा गले लगाने की खुशी ने इस पूरी पीड़ा को सार्थक कर दिया। यह घटना याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने मनुष्य कितना छोटा है और परिवार का साथ सबसे बड़ी पूंजी है।
Frequently Asked Questions
1. मानसी पारेख किस यात्रा पर गई थीं?
मानसी पारेख सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा पर चीन और नेपाल गई थीं।
2. उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?
उन्हें चीन के नायलम शहर में लैंडस्लाइड के कारण घंटों बस में रुकना पड़ा और नेपाल बॉर्डर पार करने के लिए पैदल कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा।