निर्माता प्रणय रेड्डी वंगा ने खुलासा किया है कि मुंबई में 'एनिमल' बनाने की लागत हैदराबाद की तुलना में 30% अधिक थी, यही कारण है कि प्रभास की फिल्म 'स्पिरिट' की शूटिंग हैदराबाद में की जा रही है।
- मुंबई में 'एनिमल' का निर्माण हैदराबाद की तुलना में 20-30% अधिक महंगा था।
- प्रभास अभिनीत फिल्म 'स्पिरिट' का पूरा निर्माण हैदराबाद में किया जाएगा ताकि बजट और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो सके।
- स्टूडियो स्पेस की कमी और मुंबई की कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली लागत बढ़ाने के मुख्य कारण रहे।
ब्लॉकबस्टर फिल्म एनिमल और आगामी फिल्म स्पिरिट के निर्माता प्रणय रेड्डी वंगा ने मुंबई और हैदराबाद में फिल्म निर्माण की लागत के बीच के भारी अंतर को उजागर किया है। 'ऑनेस्ट टाउनहॉल' में एक बातचीत के दौरान, वंगा ने खुलासा किया कि मुंबई में शूटिंग करने से उनके बजट में लगभग 20% से 30% की वृद्धि हुई, जबकि हैदराबाद में यह प्रक्रिया कहीं अधिक सरल और सस्ती होती।
यह वित्तीय अंतर काफी बड़ा है। इंडस्ट्री ट्रैकर के अनुसार, एनिमल का बजट लगभग 200 करोड़ रुपये था। यदि इसमें 30% की बचत होती, तो यह राशि लगभग 60 करोड़ रुपये होती—जो एक मध्यम बजट की पूरी तेलुगु फिल्म बनाने के लिए पर्याप्त है। इसी अनुभव के कारण संदीप रेड्डी वंगा की अगली फिल्म स्पिरिट, जिसमें प्रभास मुख्य भूमिका में हैं, की शूटिंग पूरी तरह से हैदराबाद में करने का निर्णय लिया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव 'पैन-इंडिया' फिल्म निर्माताओं के बीच एक नए रुझान को दर्शाता है। हालांकि मुंबई वैश्विक स्तर पर पहचान और कॉर्पोरेट ढांचा प्रदान करता है, लेकिन हैदराबाद का बुनियादी ढांचा—विशेष रूप से विशाल स्टूडियो और फिल्म निर्माताओं के बीच आपसी सहयोग—बड़े बजट की फिल्मों के लिए बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) प्रदान करता है।
वंगा ने बताया कि मुंबई की प्रोडक्शन संस्कृति बहुत अधिक कॉर्पोरेट और औपचारिक है। वहां बजट और नियंत्रण सब कुछ कागजों पर होता है, जिससे रचनात्मक बदलावों के दौरान लचीलेपन की कमी रहती है। इसके विपरीत, हैदराबाद में फिल्म निर्माताओं के बीच गहरा सम्मान और सहयोग है, जिससे सेट लगाने और शॉट्स तैयार करने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
"अंतर केवल पैसों का नहीं है; यह प्रोडक्शन की गति और तेलुगु बाजार में मौजूद स्टार-पूजा की संस्कृति का है।"
काम के घंटों पर चर्चा करते हुए वंगा ने कहा कि मुंबई में 12 घंटे की लचीली शिफ्ट (जैसे सुबह 9 से रात 9) चलती है। वहीं, तेलुगु उद्योग में घंटे अधिक निश्चित होते हैं और आमतौर पर शाम 6 या 9 बजे तक काम होता है। उन्होंने यह भी गौर किया कि मुंबई का दर्शक वर्ग हैदराबाद की तुलना में कम 'स्टार-ड्रिवन' है, जबकि दक्षिण में सितारों के प्रति एक अलग स्तर की दीवानगी देखी जाती है।
| विशेषता | मुंबई (बॉलीवुड) | हैदराबाद (टॉलीवुड) |
|---|---|---|
| लागत दक्षता | अधिक महंगी (20-30% अधिक) | किफायती (कम लागत) |
| बुनियादी ढांचा | स्टूडियो में जगह की कमी | विशाल और सुलभ सेट |
| कार्य संस्कृति | कॉर्पोरेट, औपचारिक, कठोर | सहयोगात्मक, लचीला |
| दर्शक वर्ग | कम स्टार-केंद्रित | अत्यधिक स्टार-पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'स्पिरिट' की शूटिंग मुंबई के बजाय हैदराबाद में क्यों की जा रही है?
लागत में लगभग 20-30% की बचत करने और बेहतर स्टूडियो बुनियादी ढांचे और लचीले कार्य वातावरण का लाभ उठाने के लिए इसे हैदराबाद में शूट किया जा रहा है।
दोनों शहरों की कार्य संस्कृति में मुख्य अंतर क्या है?
मुंबई का दृष्टिकोण अधिक कॉर्पोरेट और दस्तावेजीकरण पर आधारित है, जबकि हैदराबाद का उद्योग अधिक सहयोगात्मक है और पारंपरिक कार्य घंटों का पालन करता है।