निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' के यथार्थवाद की जमकर तारीफ की है, जबकि यश की फिल्म 'टॉक्सिक' बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रही है। आरजीवी ने स्टार-ड्रिवेन सिनेमा के ढर्रे पर कड़ा प्रहार किया है।
- राम गोपाल वर्मा ने 'धुरंधर' के किरदारों की वास्तविकता और गहराई की प्रशंसा की।
- आरजीवी ने 'टॉक्सिक' जैसी फिल्मों में केवल 'स्टाइल' और 'स्लो मोशन' होने का आरोप लगाया।
- बॉक्स ऑफिस डेटा के अनुसार, 'धुरंधर 2' ने 'टॉक्सिक' की तुलना में कहीं अधिक कमाई की है।
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा (RGV) एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' की जमकर तारीफ की है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है।
आरजीवी ने तर्क दिया कि आधुनिक फिल्म निर्माताओं को 'धुरंधर' से यह सीखना चाहिए कि किरदारों को 'जीवंत' कैसे बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि फिल्म के पात्र इतने वास्तविक लगते हैं जैसे वे हमारे बीच के ही लोग हों, जो इसे दर्शकों के लिए अत्यधिक रिलेटेबल बनाता है। अपनी 1998 की क्लासिक फिल्म 'सत्या' से तुलना करते हुए, वर्मा ने कहा कि 'धुरंधर' ने यथार्थवाद (Realism) को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आरजीवी का यह हमला केवल एक फिल्म के खिलाफ नहीं, बल्कि वर्तमान भारतीय सिनेमा के 'लार्जर-देन-लाइफ' हीरो कल्चर के खिलाफ है। वह यह संकेत दे रहे हैं कि दर्शक अब केवल 'एलिवेशन शॉट्स' और 'स्लो मोशन' से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि उन्हें कहानी में गहराई और मानवीय भावनाएं चाहिए।
"सिनेमा में जब स्टाइल कहानी से आगे निकल जाता है, तो फिल्म केवल एक विजुअल स्पेक्टेकल बनकर रह जाती है, जिसमें आत्मा की कमी होती है।"
वर्मा ने विशेष रूप से अक्षय खन्ना के किरदार 'रहमान डकैत' और संजय दत्त के पात्रों की सराहना की, यह कहते हुए कि ये किरदार केवल स्टार को सजाने के लिए नहीं रखे गए, बल्कि उनकी अपनी अलग पहचान, डर और स्वभाव है। इसके विपरीत, उन्होंने 'टॉक्सिक' जैसी फिल्मों में महिला पात्रों के चित्रण की आलोचना की और कहा कि वे केवल मुख्य नायक के इर्द-गिर्द एक 'फंक्शन' की तरह काम करती हैं, न कि वास्तविक इंसानों की तरह।
हिंसा के चित्रण पर बात करते हुए आरजीवी ने कहा कि 'धुरंधर' में हिंसा का एक कारण और परिणाम होता है, जबकि अन्य व्यावसायिक फिल्मों में हिंसा केवल एक तमाशा बनकर रह जाती है, जहाँ 'एटीट्यूड' ही प्लॉट बन जाता है।
| विशेषता | धुरंधर 2: द रिवेंज | टॉक्सिक (Toxic) | |
|---|---|---|---|
| बॉक्स ऑफिस (5 दिन) | 300 करोड़+ | 300 करोड़ से कम | |
| कुल कमाई | 3,000 करोड़+ | संघर्षरत | |
| मुख्य फोकस | यथार्थवाद और चरित्र | स्टाइल और विजुअल्स |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आरजीवी ने 'टॉक्सिक' की आलोचना क्यों की?
आरजीवी का मानना है कि फिल्म में किरदारों की गहराई की कमी है और यह केवल हीरो के 'इमेज' को चमकाने पर केंद्रित है।
प्रश्न 2: 'धुरंधर' और 'टॉक्सिक' के बीच क्या संबंध है?
ये दोनों फिल्में मूल रूप से 19 मार्च, 2026 को एक साथ रिलीज होने वाली थीं, लेकिन बाद में 'टॉक्सिक' को स्थगित कर दिया गया।